विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन बुधवार को जहां हिमाचल प्रदेश के स्टोन क्रेशर को लेकर विपक्ष ने सरकार की घेरे बंदी की

 

 

विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन बुधवार को जहां हिमाचल प्रदेश के स्टोन क्रेशर को लेकर विपक्ष ने सरकार की घेरे बंदी की वहीं मुख्यमंत्री ने केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश में बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई नहीं की गई है।  मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को बाढ़ से करीब 10000 करोड रुपए का नुकसान हुआ है , लेकिन केंद्र सरकार द्वारा केवल मात्र 397 करोड रुपए की धनराशि ही हिमाचल को दी गई है , कुल नुक्सान का केवल 6.40 प्रतिशत बैठता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को 9900 करोड़ रुपए का मेमोरेंडम आफ लॉस भेजा गया है जिसकी एवज में केंद्रीय नियमों के अनुसार काम से कम 1605 करोड़ रुपए की राशि प्रदेश को मिलनी चाहिए थी। इनमें से भी केवल मात्र 216 करोड रुपए ही दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भाजपा ने हिमाचल प्रदेश से भेदभाव किया है। हिमाचल की जनता सब जानती है कि कितना लोगों को ठगना है और बोलना है। केंद्र से विशेष पैकेज की उम्मीद नहीं की जा सकती है।
सुक्खू ने कहा कि भाजपा सांसद दिल्ली जाते हैं तो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मिलने से घबराते हैं। मैं अंतिम सप्ताह में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मिलने जाऊंगा। वहां हिमाचल के हितों की बात को फिर से उठाया जाएगा। सुक्खू ने कहा कि अगर अभी भी भाजपा विधायक चाहें तो उनके साथ दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मिल सकते हैं। हिमाचल के लोगों को आपदा से जो नुकसान हुआ है, एक-एक पाई करके उनके लिए मदद दी जाएगी।
इस पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि अगर राशि देखें तो हिमाचल के लिए सबसे बड़ी है। केंद्र ने यह नहीं कहा कि आगे मदद नहीं मिलेगी। अपनी बात को केंद्र से ठीक तरह से रखें। ताली दोनों हाथ से बजती है। विकसित भारत यात्रा शुरू की गई है, जिससे भारत आने वाले समय में विकसित राज्यों में आएगा।

 

 

 

 

 

 

 

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Author: powan dhiman

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