एससी-एसटी से अत्याचार के मामलों का हो त्वरित निपटारा’ जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक में डीसी ने दिए निर्देश

 

 

अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की त्रैमासिक बैठक मंगलवार को उपायुक्त हेमराज बैरवा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस अवसर पर जिला में उक्त अधिनियम के तहत दर्ज 79 मामलों की ताजा स्थिति और इनसे संबंधित मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई।

उपायुक्त ने बताया कि अभी इन 79 मामलों में से 28 मामले विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन हैं। जबकि, 35 मामलों की अभी पुलिस जांच चल रही है। 12 मामलों की कैंसलेशन रिपोर्ट्स न्यायालयों में विचाराधीन हैं और 4 मामलों की कैंसलेशन रिपोर्ट्स अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की गई हैं। उन्होंने पुलिस और अभियोजन विभाग के अधिकारियों से कहा कि इन मामलों की जांच एवं अभियोजन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए तथा सभी लंबित मामलों का नियमित रूप से फॉलोअप किया जाना चाहिए।

उपायुक्त ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज होने पर इसकी कॉपी तुरंत जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय को प्रेषित करें तथा इसकी प्राप्ति की पुष्टि भी करवा लें, ताकि पीड़ित व्यक्ति को तुरंत राहत राशि जारी की जा सके। उपायुक्त ने कहा कि कई मामलों से जमीन के विवाद भी जुड़े होते हैं। इनके त्वरित निपटारे के लिए अगर निशानदेही की आवश्यकता है तो इसके लिए राजस्व विभाग के अधिकारी आवश्यक कदम उठाएं तथा निशानदेही के संबंध में तहसीलदार के आदेशों की कॉपी अवश्य संलग्न करें। उपायुक्त ने पुलिस अन्वेशण अधिकारियों से कहा कि जिला में अगर कोई गंभीर मामला सामने आता है तो उसे तुरंत जिला प्रशासन के ध्यान में भी लाएं, ताकि पीड़ितों की तत्काल मदद की जा सके।

बैठक में समिति के गैर सरकारी सदस्यों ने भी विभिन्न मामलों पर अपनी राय रखी। इस अवसर पर समिति की सदस्य सचिव एवं जिला कल्याण अधिकारी गीता मरवाहा ने विभिन्न मामलों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया।

 

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Author: powan dhiman

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