व्यवस्था परिवर्तन का नारा देने वाली कांग्रेस सरकार फिज़ूल खर्च को दे रही बढ़ावा : नवीन शर्मा ।

 

 

हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के पूर्व वाइस चेयरमैन व भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नवीन शर्मा ने जारी प्रैस नोट में कहा कि व्यवस्था परिवर्तन का नारा देने वाली कांग्रेस सरकार फ़िज़ूल ख़र्चे को बढ़ावा दे रही है उन्होंने कहा कि आज कल पढ़ाई के समय में ज़िला के विद्यालयों में वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह हो रहे हैं वहाँ पर मुख्य अतिथि के रूप में कांग्रेस के विधायक, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार व चैयरमैन जा रहे हैं ।कार्यक्रम में विद्यालय प्रशासन को 50-50 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने की लम्बी लिस्टें पहले से ही थमा दी जा रही हैं ।जिससे विद्यालयों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है ,यह तर्कसंगत नहीं है ।

व्यवस्था परिवर्तन का ढ़कोंसला रूपी नारा देने वाली सरकार स्कूलों पर आर्थिक बोझ डालने का काम कर रही है यह बहुत ही दुर्भाग्य का विषय है ।

 

नवीन शर्मा ने मुख्यमंत्री से प्रश्न करते हुए कहा कि क्या यही आप का व्यवस्था परिवर्तन है ।

 

नवीन शर्मा ने कहा कि भाजपा की सरकार में बच्चों की पढ़ाई पर जोर दिया जाता था और कोई भी फ़िजूल खर्ची विद्यालयों में वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोहों पर नहीं की जाती थी परंतु बहुत ही दुर्भाग्य का विष्य है कि व्यवस्था परिवर्तन का नारा देने वाली सरकार सरकारी खजाने को खाली करने में लगी हुई है ।

नवीन शर्मा ने कहा की एक तरफ मुख्यमंत्री बोलते हैं सरकार के पास पैसा नहीं है परंतु दूसरी तरफ जनता के पैसों से फ़िजूल खर्ची को बढ़ावा प्रदेश की कांग्रेस सरकार दे रही है।

नवीन शर्मा ने कहा कि कल जो हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का निर्णय आया है उसका वो स्वागत करते हैं

कांग्रेस सरकार ने जो सी.पी.एस. बनाये थे और उनको जो सुविधायें दी गई थीं उनपर माननीय हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है यह हिमाचल प्रदेश में फ़िजूल खर्च को रोकने के लिए एक सराहनीय कदम है ।

नवीन शर्मा ने कहा कि सी.पी.एस.के मामले में पहले भी कांग्रेस सरकार की फजीहत हुई थी परंतु प्रदेश में आर्थिक संकट होने के बाद भी गत एक साल में सी.पी.एस. पर करोड़ों रुपये खर्च किये गये जो प्रदेश के विकास में लगाये जा सकते थे ।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में आर्थिक संकट गत एक साल में कांग्रेस सरकार द्वारा लिए गए बेतुके निर्णयों के कारण ही आया है जिससे विकास के सारे काम बंद पड़े हुए हैं ।

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Author: powan dhiman

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