राम लला की प्राण प्रतिष्ठा अयोध्या में हुई लेकिन दूर दूर तक लोगों ने अलौकिक अनभूति की प्राप्त

 

 

 

   भाजपा प्रदेश सह मीडिया प्रभारी अंकुश दत्त शर्मा ने कहा कि इन दिनों दुनिया का शायद ही कोई ऐसा कोना बचा होगा जहां पर अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में प्रभु राम लला के विराजमान होने पर खुशियां नहीं मनाई गई होंगी क्योंकि जैसे प्रभु श्री राम इस जग के कणकण में बसे हैं वैसे ही उनके भक्त विश्व के कोने कोने में मौजूद है। पिछले एक महीने से राम मंदिर की धूम पूरी दुनिया में मची हुई है। अवध में रघुराई के बाल स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा की खुशी में राम भक्तों ने घर-घर भगवे लहराकर जो राम मय वातावरण बनाया है वह स्नातनियों को सुकून देने वाला ऐतिहासिक अनुभव है क्योंकि सदियों से न जाने कितनी ही पीढियां इन पलों के इंतजार करते करते खप गयी बलिदान हो गयी या समर्पित होकर कड़ी मेहनत से प्रयासरत रही। यह खुशी जीवन के अनेकों बसन्त देख चुकी बूढ़ी आँखों में और दुनिया की दौड़ में बराबर शामिल होकर दौड़ने के लिए तैयार युवा आंखों में एक समान दिख रही है। ऋषिमुनियों के तप और जीवन समर्पित करने वाली राम भक्त पुण्यात्माओं के बलिदान की नींव पर शुरू होकर आज यह हेतु सफल हुआ है तो इसके पीछे हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और उनकी अपने हर संकल्प को साकार रूप में परिवर्तित कर सिद्ध करने की कार्यशैली भी निहित है।प्रधामंत्री मोदी राम लल्ला के अयोध्या रामजन्म भूमि में भव्य राम मंदिर में स्थापित होने के चिर प्रतीक्षित दिव्य स्वप्न को पूरा होते देखने वाली हर आँख का तारा बन गए हैं। 

  अंकुश दत्त शर्मा ने कहा कि रामायण में हम सब ने जाना है कि कैसे रामसेतु निर्माण के वक्त एक गिलहरी ने भी अपना योगदान दिया था। लेकिन निर्लज्जता की सीमा कैसे पार करते हैं और राजनीतिक स्वार्थ के लिए चुनावी भक्त कैसे बनते हैं यह उसे पार्टी के लोगों को देखकर अच्छी तरह पता चल रहा है जो एक तरफ तो अदालत में हलफनामा लिख कर देते हैं कि भगवान राम काल्पनिक थे और दूसरी तरफ मंचों से गले फाड़ रहे हैं कि हम भी प्रभु श्री राम के भक्त हैं। एक तरफ बयान देते हैं कि हमने हिंदुत्व वादी विचारधारा को हराया है और दूसरी तरफ यह आडंबर दिखाते हैं कि हम भी राम को मानने वाले हैं। सनातन धर्म ही वास्तव में हिंदुत्व वादी विचारधारा है। सनातन को डराने मिटाने हटाने की हसरत पाले कई आए कई चले गए। लेकिन कुछ तो बात अलग है हमारी हस्ती मिटाय नहीं मिटती हमारी। सनातन अजर है अजय है अमर है। जो इसका विरोध करेगा वह फल जरूर भोगेगा।

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Author: powan dhiman

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