
हिमाचल प्रदेश में बगावत पे उतर आए है पूर्व विधायक अब ये देखना है की लोकसभा चुनावों में क्या होता है अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावत करने वाले कांग्रेस के 6 विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी। में इनकी याचिका एडमिशन के लिए सूचीबद्ध की गई है। चैतन्य शर्मा व अन्य बनाम स्पीकर हिमाचल विधानसभा केस आज सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर दो में लग सकता है।
हिमाचल विधानसभा के स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने बीते 29 फरवरी को सुजानपुर से बागी पूर्व विधायक राजेंद्र राणा, धर्मशाला से सुधीर शर्मा, लाहौल स्पीति से रवि ठाकुर, बड़सर से इंद्रदत्त लखनपाल, गगरेट से चैतन्य शर्मा और कुटलेहड़ से देवेंद्र कुमार भुट्टो को अयोग्य घोषित ठहराया है।
बागियों पर आरोप है कि पार्टी द्वारा व्हिप जारी करने के बावजूद ये लोग कट मोशन प्रस्ताव पर वोटिंग और बजट व फाइनेंशियल बिल पास करते वक्त सदन से गैर हाजिर रहे। ऐसा करके इन्होंने व्हिप का उलंघन किया है।
स्पीकर ने इन्हें संसदीय कार्य मंत्री हर्ष वर्धन चौहान की याचिका पर सुनवाई करने के बाद अपने आदेश सुनाए हैं। स्पीकर के इस निर्णय को बागी पूर्व विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। प्रदेश वासियों की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हुई हैं।
प्रदेश सरकार की ओर से भी इस मामले में कैविएट फाइल कर दी गई है, ताकि बागी विधायकों की याचिका पर फैसला सुनाने से पहले स्टेट को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिल सके।
इससे जुड़े मामले में सरकार ने बागी विधायक चैतन्य शर्मा के पिता एवं रिटायर आईएएस राकेश शर्मा और इंडिपेंडेंट एमएलए आशीष शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया है। इन पर विधायकों की खरीद-फरोख्त और सरकार गिराने के लिए षड्यंत्र रचने का आरोप लगा है।
बागियों के वोट से राज्यसभा चुनाव हारी कांग्रेस
कांग्रेस के 6 बागी विधायकों ने बीते 27 फरवरी को राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन को वोट डाला है। इससे हिमाचल में बहुमत के बावजूद कांग्रेस राज्यसभा चुनाव हार गई। कांग्रेस के 6 बागी सहित तीन निर्दलीयों ने भी भाजपा प्रत्याशी को वोट दिया। इससे भाजपा के हर्ष महाजन और कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी को 34-34 वोट मिले। बाद में लॉटरी से हर्ष महाजन चुनाव जीत गए।
68 विधायकों वाली हिमाचल विधानसभा में कांग्रेस के पास 40 MLA, बीजेपी के पास 25 और तीन निर्दलीय थे। बावजूद इसके कांग्रेस चुनाव हार गई। इन विधायकों की बगावत की मुख्य वजह मुख्यमंत्री सुक्खू से नाराजगी है, जिससे इन्होंने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की। इससे पूर्ण बहुमत वाली सरकार पर भी संकट आ गया था, क्योंकि बजट सत्र में विधायकों की संख्या 34-34 हो गई थी। ऐसे में वोटिंग होती तो वित्त वर्ष 2024-25 का बजट और फाइनेंशियल बिल पास नहीं हो पाता।
है, जिससे इन्होंने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की। इससे पूर्ण बहुमत वाली सरकार पर भी संकट आ गया था, क्योंकि बजट सत्र में विधायकों की संख्या 34-34 हो गई थी। ऐसे में वोटिंग होती तो वित्त वर्ष 2024-25 का बजट और फाइनेंशियल बिल पास नहीं हो पाता।पहले स्पीकर ने 15 विधायकों को सदन से विधानसभा की कार्यवाही के लिए सस्पेंड कर दिया था। इन पर स्पीकर चैंबर के बाहर मार्शल से मारपीट करने के आरोप थे। 15 विधायक सस्पेंड
