हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में 39% राजपूत 31% ब्राह्मण 25% अनुसूचित जाति और 7% ओबीसी को अन्य लोग आते।

 

 

 

हमीरपुर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की टिकट की जंग अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। यहां कांग्रेस की टिकट के लिए इसलिए भी टिकटार्थी ज्यादा जोर लगा रहें हैं कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हमीरपुर जिला से होने का लाभ लाभ निश्चित तौर पर कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को हमीरपुर विधानसभा उपचुनावों में मिलना है।

 

जहां तक हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के टिकटार्थियों की बात करें तो उसमें सबसे प्रमुख तौर पर पूर्व प्रत्याशी डॉ पुष्पेंद्र वर्मा का नाम लिया जा रहा है। गौरतलब है कि चुनाव हारने के बावजूद भी डॉक्टर पुष्पेंद्र वर्मा ने पूरे 2 वर्ष तक फील्ड नहीं छोड़ी और आम जनता से जुड़े रहे और इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आशीर्वाद भी उनको पूरी रूप से मिलता रहा है। जिस प्रकार से डॉक्टर वर्मा ने फील्ड वर्क किया उसका लाभ कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिला। जहां कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों में पिछली बार के मुकाबले यहां लगभग 11000 वोट अधिक लिए। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पूरे विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की जिस प्रकार से कमान संभाली वह उनकी इस विधानसभा क्षेत्र में धरातल पर मजबूत पकड़ को दिखाता है। डॉक्टर पुष्पेंद्र वर्मा की पहचान एक जाने माने चकित्सक और एक तेज तर्रार कर्मचारी नेता की भी रही है और प्रदेश के कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग उनके साथ खड़ा दिखाई देता है। इसके इलावा हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में डॉक्टर पुष्पेंद्र वर्मा के पक्ष में जातीय समीकरण भी दिखाई दे रहे हैं हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में आज तक राजपूत नेताओं का ही दबदबा रहा है। 1977 से लेकर इस हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में राजपूत नेता ने ही इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है।

हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में 39% राजपूत 31% ब्राह्मण 25% अनुसूचित जाति और 7% ओबीसी को अन्य लोग आते।

 

गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों राष्ट्रीय दलों ने राजपूत नेताओं को यहां से टिकट दी थी, भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व विधायक नरेंद्र ठाकुर ने यहां से चुनाव लड़ा था वहीं कांग्रेस की ओर से पुष्पेंद्र वर्मा यहां चुनाव मैदान में थे। इन दोनों को हराकर आशीष शर्मा यहां पर चुनाव जीत गए थे। जानकारी का कहना है कि राजपूत वोटो का बंटवारा होने का सीधा लाभ उसे समय आजाद ब्राह्मण, प्रत्याशी आशीष शर्मा को मिला था। इस बार जहां भारतीय जनता पार्टी से पूर्व विधायक आशीष शर्मा का टिकट लगभग तय माना जा रहा है वही यदि कांग्रेस यहां किसी राजपूत नेता को चुनावी मैदान में उतरती है तो जाति समीकरण कांग्रेस की पक्ष में हो सकता है।

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Author: powan dhiman

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