जिला हमीरपुर में उपचुनावों के लिए कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी डॉ पुष्पेंद्र वर्मा जब से टिकेट मिली है तब से लोगों के बीच जा रहे हैं लेकिन उपचुनाव में ये भी देखा जा रहा है कि जिला अध्यक्ष मंडल अध्यक्ष प्रभारी और सह प्रभारी चेयरमैन वाइस चेयरमैन की लंबी चौड़ी उपस्थिति जो सरकार वह संघठन में है वह कहीं नहीं दिखाई दे रही है। मिली सूत्रों की जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि सुजानपुर और बड़सर में जो उपचुनाव हुए हैं उसमें सभी कार्यकर्ता पदाधिकारी पार्टी के प्रत्याशी के साथ एकजुटता के साथ कार्य में लगे थे लेकिन अब हमीरपुर में पार्टी के प्रत्याशी के साथ उस तरह से नहीं दिख रहे है । लेकिन जिस तरह से हमीरपुर में राजनीतिक माहौल है इससे साफ जाहिर होता है कि वह अपने ही निजी हित्तो को आगे रख कर चल रहे है , क्योंकि कुछ दिन पहले टिकेट की चाह रखने वाले कुछ कार्यकर्ता व पार्टी के बड़े पदों पर बैठे लोगों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और आज वही कार्यकर्ता अपने निजी स्वार्थ को साधने के लिए यह राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं क्या ईन लोगों के लिए मुख्यमंत्री के मान सम्मान से भी बड़ा पद है या फिर यू कहा जा सकता है की ईन को तो सिर्फ़ अपने पदों की ही लालसा है। मुख्यमंत्री ने इन्हीं लोगों को ऊंचे ऊंचे पदों पर बिठाया है लेकिन आज वही लोग मुख्यमंत्री की पीठ पर छुरा घोपने का काम कर रहे हैं और जो हमीरपुर विधानसभा के प्रत्याशी हैं उनको भी कमजोर करने में लगे हुए हैं। इन सब बातो से एक प्रशन उठता है! एक तरफ मुख्यमंत्री जी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की बात कर भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में डटे है और उन्ही के पार्टी के कुछ नेता अपने राजनीतिक हित साधने के लिए उनकी लड़ाई को कमजोर कर रहे है। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री जी इस परिस्थिति से कैसे निपटते है ये तो समय ही बताएगा

