प्रभु श्री राम और लक्ष्मन विश्वामिन के सान्च जनक पूरी में पहुंचे:

प्रभु श्री राम और लक्ष्मन विश्वामिन के सान्च जनक पूरी में पहुंचे:

श्री राम ने जब जनकपुरी की सोभा देखी, तब थे लक्ष्‌भन सहित बड़े हर्षित हुए!

वहां अनेको बावतियों, कुए, नदी और तालाब हैं। जिनमें अमृत के समान जल है और मजियों की सिढ़ियों हैं। राजा जनकजी अपने समाज के सान्य आए, विश्वामित वहुत प्रकार से स्वागत किया, इतने का में श्री राम और लक्ष्‌मन

वहां आए, स्याम गौर मृद्ध वयस किसोरा । लोचन सुखद विस्व चित चोग।

श्याम और गौर वर्ष के दोनों कुमार, नेत्रो को सुख देने वाले चित को चुराने वाले हैं।

राम कथा जीव को बहुत ही करू जरूरी है। क्यकि जीव भूल चुका है मैं कौन, क्या हूँ, संसार में कम क्या क्या ! क्योकि जब तक जीव को ये पता न चले कौन हूँ तव तक जीव का सुधार नहीं हो सकता । श्री राम की नर लोला यही हमें सिखाती है।

powan dhiman
Author: powan dhiman

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