खुले बाजार से सोसाइटीज खुद खरीद कर बेच रही तेल, हमारे पास कोई शॉर्टेज नहीं .. सिविल सप्लाई एरिया मैनेजर संजीव वर्मा

 

 

 

 

उपमंडल बड़सर की समताना पंचायत के सुरजीत कुमार की शिकायत के बाद सोसाइटियों द्वारा बेचे जा रहे तेल में खेल का मामला सामने आ रहा है । जानकारी मिली है कि सिविल सप्लाई के गोदाम में किसी प्रकार की शॉर्टेज ना होने के बावजूद सोसाइटियों द्वारा अपने स्तर पर खुले बाजार से तेल खरीद कर बेचा जा रहा है । सोसाइटियों द्वारा पीडीएस के तहत तेल खरीद कर बेचे जाने पर जहां मार्जिन 3% के आसपास रहता है वही खुले बाजार से तेल खरीदने के बाद यही मार्जिन कई गुना बढ़ जाता है। शायद यही कारण है कि उपभोक्ताओं को कम गुणवंता वाला खाद्य तेल बेचा जा रहा है जिससे वे स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करने के बाद विभाग को शिकायत करने पर मजबूर हैं।

जानकारी के मुताबिक सिविल सप्लाई विभाग को जब मामले की शिकायत पहुंची तो एडमिनिस्ट्रेशन लेवल तक शिकायत पहुंचाई गई ताकि उपभोक्ताओं की सेहत के साथ कोई खिलवाड़ ना हो सके तथा खराब तेल के सैंपल भरे जाएं। इस संदर्भ में विभाग द्वारा डीएफएससी को भी लिखा गया था कि जो सोसाइटियां पीडीएस का तेल ना लेकर बाहर से तेल ले रही हैं उन पर कार्यवाही की जाए। विभाग द्वारा स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि उपभोक्ताओं तक उच्च गुणवत्ता वाला पीडीएस तेल न पहुंचा कर खुले बाजार का कम गुणवत्ता वाला तेल पहुंचना सीधे-सीधे उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन है l

इस संदर्भ में एरिया मैनेजर सिविल सप्लाई हमीरपुर संजीव वर्मा का कहना है कि हमारे पास तेल की कोई शॉर्टेज नहीं है इसके बावजूद सोसाइटियों द्वारा अपने स्तर पर खुले बाजार से तेल खरीद कर बेचा जा रहा है इसके बारे में फूड सेफ्टी विभाग के साथ-साथ डीएफएससी को भी शिकायत की गई है।

पंचायत सचिव समताना सुरेश कुमार का कहना है कि कई बार सिविल सप्लाई से रिफाइंड तेल की ही आपूर्ति होती है जबकि उपभोक्ताओं की डिमांड के मुताबिक मस्टर्ड ऑयल हमें खुले बाजार से खरीदना पड़ता है l

 

इस मामले में सोशल एक्टिविस्ट परमजीत ढटवलिया ने बताया कि डेढ़ महीने बाद भी सैंपल का रिजल्ट सामने नहीं आ सका है जबकि हमने निजी स्तर पर अपनी जेब से 13641 रू फीस भरकर जब लैब से जांच करवाई तो इस ब्रांड के सरसों के तेल के सैंपल फेल पाए गए । उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है कि उचित मूल्य की दुकान पर बिक रहे घटिया खाद्य सामग्री से अगर लोगों को गंभीर स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का सामना करना पड़ता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा । वहीं फूड  सहायक आयुक्त (खाद्य सुरक्षा एवं मानक) अनिल शर्मा का कहना है कि अब तक हमारे रिपोर्ट नहीं आई है

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Author: powan dhiman

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