फजीहत से बचने के लिए चुनावी राज्यों में नहीं गए सुक्खू

पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कहा है कि सुक्खू सरकार देश की पहली ऐसी सरकार है जिसने प्रदेश में हर वर्ग की सुविधायें बंद करने का रिकॉर्ड काम किया है और पौने 2 साल में ही जनता के भरोसे को तार तार कर दिया है। 

 

आज यहां जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने कहा कि सत्ता संभालने के बाद सुक्खू सरकार ने सबसे पहले तो पूर्व भाजपा सरकार द्वारा खोले गए संस्थान बंद कर दिए। फिर युवाओं के लिए नौकरियों के दरवाजे बंद कर दिए और जिन युवाओं ने नौकरियों के लिए साक्षात्कार दिए थे, उन साक्षात्कार के नतीजे रोक दिए। सरकार ने कर्मचारियों के एरियर और महंगाई भत्ते के भुगतान बंद कर दिए। राज्य परिवहन निगम की बसों में जिन्हें निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलती थी, वह भी बंद कर दी। पूर्व भाजपा सरकार द्वारा दी गई बिजली फ्री की सुविधा के साथ-साथ निशुल्क पेयजल सुविधा बंद कर दी। चुनावों से पहले महिलाओं को ₹1500 भत्ता देने का जो लॉलीपॉप दिया गया था, वह भी फाइलों में बंद कर दिया। जो 10 गारंटियाँ जनता को दी गई थी , वह डस्टबिन में बंद कर दी।

 

राजेंद्र राणा ने कहा कि जिस तरह से सुक्खू सरकार ने एक के बाद एक सुविधायें बंद की हैं, उससे देश के अन्य राज्यों में भी लोग कांग्रेस की गारंटीयों को झूठ का पुलिंदा समझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में अभी चुनाव चल रहे हैं और जहां हिमाचल के तर्ज पर कांग्रेस गारंटीयों का ऐलान कर रही है, वहां पर जब हिमाचल की झूठी गारंटीयों पर सवाल उठ रहे हैं तो कांग्रेस नेताओं की सिट्टी पिट्टी भी गुम हो रही है। राजेंद्र राणा ने कहा कि ऐसी चर्चा भी है कि हिमाचल के मुख्यमंत्री को हाई कमान ने चुनावी राज्यों में प्रचार पर इसलिए जाने से रोक दिया है ताकि कहीं हिमाचल की झूठी गारंटीया कांग्रेस के गले की फांस ना बन जाएं, इसलिए मुख्यमंत्री को यह प्रचारित करना पड़ रहा है कि वह तबीयत ठीक न होने की वजह से चुनाव प्रचार पर नहीं जा पाए। राजेंद्र राणा ने कहा कि शायद कांग्रेस आलाकमान सुक्खू को आगे करके चुनावी राज्यों में कांग्रेस की फजीहत नहीं करवाना चाहती।

राजेंद्र राणा ने कहा कि सुक्खू सरकार प्रदेश की पहली ऐसी सरकार बन गई है जो कर्मचारियों की सुविधायें भी रोक रही है और उनका उत्पीड़न भी कर रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि तानाशाहों को जनता ने ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं किया है और जन आक्रोश ने उनके ताज और तख्त धूल में मिला दिए हैं।

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Author: powan dhiman

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