हिमाचल आर्थिक आपातकाल की कगार पर: राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री पर साधा निशाना

 पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कार्य प्रणाली और प्रदेश में बदहाल होती आर्थिक स्थिति के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। आज यहां जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने कहा है कि प्रदेश आजादी के बाद के सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की राजनीतिक दृष्टिहीनता, आर्थिक कुप्रबंधन और जनविरोधी नीतियों ने प्रदेश को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां आर्थिक आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं।

 

*ट्रेजरी बंद, ठेकेदारों की आय ठप*

राजेंद्र राणा ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार एक महीने से कोषागार (ट्रेजरी) बंद पड़ा है। ₹10,000 से अधिक की राशि के बिल पास नहीं हो रहे हैं, जिससे विकास कार्य ठप पड़े हैं। ठेकेदारों की हालत बद से बदतर हो चुकी है, क्योंकि उन्होंने बैंकों से भारी कर्ज लेकर काम पूरा किया, लेकिन उनकी करोड़ों रुपये की कमाई सरकार की नाकामी के कारण फंसी हुई है। राणा ने कहा कि ठेकेदारों के परिवार अब भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं, जबकि सरकार इस संकट से निपटने में पूरी तरह विफल रही है।

 

*केंद्र से आने वाले फंड का दुरुपयोग*

 

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार से विभिन्न योजनाओं के लिए जो फंड प्रदेश को मिलता है, उसे विकास कार्यों में खर्च करने के बजाय सरकार अपने अन्य खर्चे पूरे करने में लगा रही है। इससे न केवल प्रदेश का आर्थिक ढांचा चरमराया है, बल्कि केंद्र के पैसे का भी जमकर दुरुपयोग हो रहा है।

 

*सरकार अपने बोझ से गिरेगी*

 

राजेंद्र राणा ने कहा कि यह सरकार अपनी अक्षमता, भ्रष्टाचार और बेवजह के खर्चों के कारण खुद अपने बोझ से गिरने वाली है। उन्होंने तीखी आलोचना करते हुए कहा कि इस सरकार के पास न तो प्रदेश के आर्थिक संकट से निपटने का कोई विजन है और न ही कोई ठोस रणनीति। राणा ने कहा कि यह सरकार जनता की समस्याओं की अनदेखी कर केवल अपने हित साधने में लगी हुई है।

 

उन्होंने कहा कि यदि हालात नहीं बदले, तो प्रदेश की विकास योजनाएं पूरी तरह ठप हो जाएंगी, जिससे आम जनता के लिए मुश्किलें और बढ़ेंगी।

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Author: powan dhiman

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