लोकल कमेटी बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी राज्य सचिवालय सदस्य एवं जिला सचिव कुशाल भारद्वाज ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार और प्रदेश की काँग्रेस सरकार जनविरोधी नव उदारवादी नीतियाँ लागू कर रही हैं, जिस कारण बेरोजगारी, महंगाई व भूखमरी बढ़ रही है। आम जनता की सुविधाएं व सबसीडियां छीनी जा रही हैं। सेवाओं का निजीकरण किया जा रहा है और उन पर टैक्स लगा कर महंगा किया जा रहा है। भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की केंद्र सरकार असल में सांप्रदायिक और कॉर्पोरेट गठजोड़ की सरकार है। भाजपा की केंद्र सरकार एक तरफ जनता पर आर्थिक बोझ लाद रही है, बेरोजगारी व महंगाई बढ़ा रही है और वहीं अपने सांप्रदायिक एजेंडे को लागू कर रही है। लोकतन्त्र को कमजोर किया जा रहा है और ईडी, सीबीआई, चुनाव आयोग और अन्य स्वतंत्र संस्थाओं और संवैधानिक संस्थाओं का दुरूपयोग किया जा रहा है।
प्रदेश की आर्थिक राजनीतिक स्थिति पर कुशाल भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश भी इस समय गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है। यह प्रदेश में भाजपा और काँग्रेस सरकारों की नव उदारवादी नीतियों और केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश की वित्तीय सहायता को रोकने के चलते हुआ है। उन्होंने कहा कि 9वें वित्तायोग द्वारा प्रदेश का स्पैशल कैटेगरी राज्य का दर्जा छीन लिया गया। जिससे प्रदेश को मिलने वाली विशेष आर्थिक सहायता बंद हो गई। इसके अलावा प्रदेश को जो रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट मिलती थी उसे मोदी सरकार ने दो बार घटाकर बहुत कम कर दिया है। प्रदेश की वन भूमि का मालिक केंद्र सरकार बन बैठी है और पंजाब पुनर्गठन आयोग के तहत हिमाचल को पुरानी संपत्तियों और प्रोजैक्टों से जो हिस्सा मिलना था, उसे कोई भी प्रदेश सरकार ले नहीं पाई है और न ही किसी केंद्र सरकार ने हिमाचल का हिस्सा दिलाने में कोई कदम उठाया है। नव उदारवादी नीतियां प्रदेश में भाजपा व कांग्रेस दोनों ही लागू करती हैं जिससे सारी सेवाएं महंगी हो रही हैं तथा बिना समुचित स्टाफ के चरमर्रा गई हैं।
प्रदेश सरकार चुनाव से पहले दी गई 10 गारंटियों को लागू करने में विफल रही है। प्रदेश भर में कोर्ट कचहरी का हवाला दे कर लंबे समय से हर सरकार के दौरान प्रदेश के किसानों की बेदखली हो रही है, घर तोड़े गए हैं, तालाबंदी हो रही है जिसका माकपा विरोध करती है। माकपा की मांग है कि 5 बीघा भूमि हर किसान की नियमित की जाये। बेदखली व तालबंदी पर रोक लगाई जाये, 1980 के वन सारंक्षण कानून को बदला जाये। किसानों को नियमित जमीन देने बारे प्रदेश सरकार नीति बनाए और केंद्र सरकार हिमाचल की वन भूमि को हिमाचल के हवाले करे। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में आवश्यक सेवाएं चरमर्रा गई हैं। सड़कों की हालत खराब है, सार्वजनिक बसों की भारी कमी है, कई जगह पीने के पानी का संकट है, अस्पतालों में डॉक्टर व अन्य स्टाफ की कमी है तो वहीं कई स्कूलों में ताले लटकाए जा रहे हैं और कई स्कूल अध्यापकों की भारी कमी झेल रहे हैं। प्रदेश में जो आर्थिक संकट बढ़ा है उसके लिए वर्तमान कांग्रेस सरकार के साथ ही पिछली भाजपा व कांग्रेस सरकारें जिम्मेवार हैं। प्रदेश के आर्थिक संकट के लिए केंद्र सरकार भी सीधे तौर पर जिम्मेवार है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति, जिसके तहत युक्तिकरण के नाम पर स्कूल बंद किए जा रहे हैं को प्रदेश में लागू करने वाली कांग्रेस सरकार देश की पहली सरकार है। केंद्र सरकार के बिजली विधेयक जिसके अनुसार बिजली का निजीकरण किया जाना है और स्मार्ट मीटर लगा कर बिजली को महंगा करना को भी प्रदेश सरकार लागू कर रही है। विधान सभा के अंदर भाजपा व कांग्रेस नूरा कुश्ती करती हैं, संकट और सेवाओं की बदहाली के लिए एक दूसरे पर आरोप लगाती हैं, लेकिन हकीकत में दोनों ही इन प्रतिगामी नीतियों को लागू करती हैं।
बैठक में लिए फैसलों की जानकारी देते हुए लोकल कमेटी सचिव रविंदर कुमार ने कहा कि किसानों की जमीन से बेदखली, तालाबंदी, भूमि अधिग्रहण और आपदा राहत के मुद्दे पर जारी प्रदेश भर में किसान बागवान आंदोलन को पूरा समर्थन देने का लोकल कमेटी ने निर्णय लिया। 28 अप्रैल को जोगिंदर नगर में होने वाले बड़े किसान प्रदर्शन को भी पार्टी अपना पूरा समर्थन व सहयोग करेगी। माकपा की लोकल कमेटी ने 20 मई की प्रस्तावित अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन हड़ताल को भी पूरा समर्थन दिया है। विभिन्न सेवाओं को दुरुस्त करने की मांग पर तथा चिट्टे के खिलाफ जनता को जागरूक करते हुए माकपा पूरे जोगिंदर नगर में अभियान व आंदोलन चलाएगी।
