उत्तरी भारत के प्रसिद्ध सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ मंदिर में शनिवार-रविवार को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन इस बार मंदिर प्रशासन की लापरवाही ने श्रद्धालुओं के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। जैसठ के पवित्र रविवार को मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, लेकिन पार्किंग की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
*अनियंत्रित बांटे जा रहे वाहन पास, और जाम की मार*
मंदिर प्रशासन द्वारा जारी किए गए वाहन पासों की अधिकता ने हालात बिगाड़ दिए। पार्किंग पूरी तरह से भर चुकी है, जिससे श्रद्धालुओं को गाड़ियां खड़ी करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सवाल उठ रहा है कि जब मंदिर परिसर में पार्किंग की सुविधा सीमित है, तो प्रशासन ने इतने अधिक पास क्यों जारी कर दिए?
*आपदा का खतरा: क्या मंदिर प्रशासन सजग है?*
गर्मियों का मौसम शुरू हो चुका है और जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। मंदिर के नजदीक ही घने जंगल हैं, और अगर किसी वजह से आग लग जाए या कोई अनहोनी हो जाए, तो भीड़भाड़ और गाड़ियों के जाम के कारण इमरजेंसी सेवाओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। क्या मंदिर प्रशासन ने इन खतरों के लिए कोई तैयारी की है?
*बाहरी राज्यों के श्रद्धालुओं पर निगरानी का सवाल*
इस बार बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों के श्रद्धालु भी मंदिर पहुंचे हैं, लेकिन सुरक्षा और निगरानी के मामले में मंदिर प्रशासन कितना सक्रिय है? पहले भी मंदिर प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं, जिसमें भक्तों के साथ धोखाधड़ी और प्रबंधन में लापरवाही शामिल है। क्या इस बार भी प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहा है?
जवाबदेही की मांग

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना मंदिर प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन लगता है कि यहां अराजकता और अव्यवस्था हावी है। अगर समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो किसी बड़ी दुर्घटना का खतरा बना रहेगा। क्या हिमाचल प्रदेश सरकार और मंदिर ट्रस्ट इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे?
