डीजीपी ने अपने पत्र में हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि एसपी संजीव गांधी की कार्यशैली पर न्यायालय ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के बीच टकराव अब अब खुलकर सामने आ रहा है। राज्य के पुलिस महानिदेशक डॉ. अतुल वर्मा ने शिमला के एसपी संजीव गांधी को निलंबित करने की सिफारिश की है। डीजीपी ने सरकार को भेजे एक पत्र में कहा है कि एसपी शिमला ने गंभीर अनुशासनहीनता, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में तुरंत सख्त प्रशासनिक कार्रवाई जरूरी है।

 

डीजीपी ने अपने पत्र में हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि एसपी संजीव गांधी की कार्यशैली पर न्यायालय ने गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा 24 मई को एसपी द्वारा की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने राज्य सरकार के मुख्य सचिव और एक संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड और केंद्र सरकार से जुड़े एक संवेदनशील मामले पर भ्रामक बयान दिए जिससे राज्य और केंद्र सरकार के रिश्तों में तनाव की स्थिति बन सकती है।

डीजीपी ने पत्र में लिखा है कि एसपी शिमला का आचरण अखिल भारतीय सेवा नियमों और हिमाचल पुलिस अधिनियम के तहत अनुशासन और सेवा गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने सिफारिश की है कि एसपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और उन्हें पुलिस मुख्यालय में रिपोर्ट करने का आदेश दिया जाए।

डीजीपी की यह सिफारिश ऐसे वक्त आई है जब एक दिन पहले ही एसपी संजीव गांधी ने डीजीपी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि डीजीपी ने अदालत में जो हलफनामा दिया है, वह उनकी जांच टीम यानी एसआईटी की साख को नुकसान पहुंचाने वाला है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस हलफनामे को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने दावा किया कि डीजीपी के निजी स्टाफ का एक सदस्य नशा तस्करी गिरोह में संलिप्त पाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सीआईडी के एक गोपनीय पत्र को चोरी कर लीक किया गया और इस पूरे प्रकरण में डीजीपी के स्टाफ की भूमिका संदिग्ध है।

 

एसपी ने आरोप लगाया कि उनकी टीम द्वारा की जा रही निष्पक्ष जांच को बाधित करने और दिशा मोड़ने की कोशिशें की गईं और इसके पीछे पुलिस मुख्यालय और राजनीतिक हस्तक्षेप का हाथ रहा। उन्होंने कहा कि यह उनके 25 वर्षों की सेवा और ईमानदारी पर सीधा हमला है जिसे वे बर्दाश्त नहीं करेंगे।

 

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी एसआईटी की जांच में कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो यह संकेत देते हैं कि विमल नेगी की मौत सामान्य नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि मृतक के परिवार ने जिस हत्या की आशंका जताई थी, उसे भी गंभीरता से लेकर जांच की गई थी।

 

दरअसल हिमाचल हाईकोर्ट ने 23 मई को चीफ इंजीनियर विमल नेगी की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला राज्य में सियासी और प्रशासनिक हलकों में खासा चर्चा में है। इससे पहले एसपी शिमला के नेतृत्व में बनी एसआईटी इस मामले की जांच कर रही थी, लेकिन मृतक की पत्नी किरण नेगी ने जांच पर सवाल उठाते हुए कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश देते हुए एसपी की भूमिका पर भी टिप्पणी की थी।

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Author: powan dhiman

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