हमीरपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़!* *निजी वाहनों में ठूंस-ठूंसकर बच्चों की भरमार, प्रशासन और स्कूल प्रबंधन मूकदर्शक!

जिले के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के साथ खतरनाक खिलवाड़ हो रहा है। स्कूलों के पास पर्याप्त बसें नहीं होने के कारण छात्रों को निजी टैक्सियों और वाहनों में ठूंसकर लाया-ले जाया जाता है। हैरानी की बात यह है कि मात्र 5-6 सीटर वाली गाड़ियों में 10-12 बच्चों को जबरन बैठाया जाता है, लेकिन स्कूल प्रबंधन की नजरें सिर्फ फीस पर टिकी हैं, बच्चों की सुरक्षा पर नहीं!

*स्कूल बसों में भी बेलगाम लापरवाही!*


स्कूल बस चालक भी बच्चों को ठूंसकर भरते हैं और तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं। पुलिस विभाग ने कई बार चालान काटकर चेतावनी दी है, सब-डिवीजन मजिस्ट्रेट ने भी सख्त हिदायतें जारी कीं, लेकिन इन लापरवाहों पर कोई असर नहीं हो रहा। सवाल यह है कि आखिर प्रशासन और स्कूल प्रबंधन इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रहे? क्या बच्चों की जिंदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण सिर्फ मुनाफा कमाना है?

*नहीं हैं सुरक्षा इंतजाम, बच्चों को खतरा!*
बच्चों को ले जाने वाले वाहनों में न तो फर्स्ट-एड बॉक्स है, न ही सीट बेल्ट्स का कोई बंदोबस्त। छोटे-छोटे मासूमों को रोजाना इस जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय अभिभावकों का आरोप है कि “हम मोटी फीस देते हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं। हर बार सवाल पूछने पर टालमटोल किया जाता है।”

*नशे के सौदागरों का खतरा!*
इतना ही नहीं, निजी वाहनों में सफर करने वाले बच्चे नशे के सौदागरों के निशाने पर भी आ सकते हैं। क्या पुलिस और स्कूल प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे रहेगा

हमीरपुर ट्रैफिक पुलिस ने पहले भी कई चालान काटे, लेकिन यह लोग सुधरने का नाम नहीं ले रहे। अब जिला प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे, वरना किसी बड़े हादसे का इंतजार न करना पड़े। क्या हमारे बच्चों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक ही सीमित है?

powan dhiman
Author: powan dhiman

Leave a Comment

error: Content is protected !!