हमीरपुर, पवन धीमान:
जिला हमीरपुर में निजी कोचिंग संस्थानों द्वारा डमी एडमिशन के नाम पर छात्रों और अभिभावकों से लाखों रुपये ऐंठने का खुला खेल चल रहा है। कई संस्थान बिना वास्तविक शिक्षा दिए, केवल फीस वसूलकर छात्रों का भविष्य खतरे में डाल रहे हैं। जब ये छात्र बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे अंक लाते हैं, तो संस्थान उन्हें गाड़ियों में घुमाकर, फूलमालाएं पहनाकर और ढोल-नगाड़ों के साथ प्रचारित करते हैं। लेकिन अगर किसी छात्र का दुर्घटना में नुकसान हो जाए, तो जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं होता!
*प्रशासन की सुस्त रवैया, शिकायतों पर नहीं हो रहा ठोस कार्रवाई*
डिप्टी डायरेक्टर, हायर एजुकेशन, हमीरपुर, श्री राम चौधरी ने बताया कि इस तरह की शिकायतें पहले भी मिल चुकी हैं। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त संस्थानों पर तो निगरानी रखी जा सकती है, लेकिन सीबीएसई से मान्यता प्राप्त संस्थानों के डिजिटल डेटा तक पहुंच न होने से जांच में बाधा आ रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से ऐसे संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
*फीस का अंधाधुंध बोझ: कब लगेगी रोक?*
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों की फीस निर्धारित है, लेकिन सीबीएसई संस्थान अपनी मनमर्जी से फीस वसूल रहे हैं। अभिभावकों की मांग है कि सरकार प्राइवेट स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के लिए एक समान फीस नीति बनाए, ताकि आम लोगों को मनमानी फीस के बोझ से राहत मिल सके।
*जनता की मांग: धांधली रोकने के लिए सख्त कार्रवाई*
शिक्षा के नाम पर हो रही इस लूट के खिलाफ जनता और अभिभावक संघर्ष कर रहे हैं। उनका सवाल है – “क्या शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रशासन गंभीर नहीं? कब तक चलेगा डमी एडमिशन और फीस का यह खेल?”
प्रशासन से मांग की जा रही है कि वह तुरंत ऐसे संस्थानों के रजिस्टर्स की जांच करे और गैर-कानूनी रूप से संचालित कोचिंग सेंटर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।
