डा राधा कृष्णन मैडीकल कालेज एवं अस्पताल में पिछले काफी अरसे से प्रिसक्रप्शन ऑडिट नहीं हो रहा है। जिससे कालेज प्रशासन की कार्य प्रणाली पर ऊँगली उठना जायज सी बात है। हालांकि कालेज प्रशासन द्वारा इस ऑडिट के लिए पांच से छह बरिष्ठ डॉक्टर्स की टीम गठित की गई है, परंतु इसके बाबजूद पिछले कुछ अरसे से इस ऑडिट को करवाने की जहमत नहीं उठाई गई। अब इस ऑडिट को नहीं करवाने के पीछे वजह क्या है ? यह तो कालेज प्रशासन और गठित कमेटी के सदस्य ही बखूबी बता सकते हैं, परन्तु ऑडिट नहीं होने से स्वास्थ सेवाओं में पारदर्शिता की कमी जरूर खल रही है। यह भी अहम है कि इस मैडीकल कॉलेज में पिछला प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट कब हुआ था इस बारे में भी जानकारी स्पष्ट तौर पर देने को कोई अधिकारी हामी नहीं भर रहा
क्या है प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट
एन.एम.सी. और सरकार के निर्देशानुसार प्रत्येक चिकित्सा संस्थानों में इस प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट कमिटी का गठित किया जाना अनिवार्य किया गया है। एक माह या इससे कम अवधि में प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट कमेटी डॉक्टर्स द्वारा मरीजों को लिखी दवाईयों के साल्ट का अवलोकन करती है। कमेटी यह भी अवलोकन करती है कि सरकार द्वारा जारी पैरामीटर के अनुसार ही डॉक्टर ने दवाईयां लिखी या नहीं।
डॉक्टर किसी ब्रांडेड कंपनी के नाम की दवाई मरीज को नहीं लिख सकता। प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट द्वारा चिकित्सा उपचार के मानकों का आकलन किया जा सकता है। यह एक गुणवत्ता सुधार प्रक्रिया है
बता दें कि सरकार ने मरीजों को सस्ती व गुणवत्तापरक दवाएं मुहैया कराने के लिए जनओषधी केंद्र खोले हैं। इसके साथ ही चिकित्सा संस्थानों में फार्मेसी के काउंटर भी संचालित किए हैं, जिनमें निशुल्क दवा प्रदान की जाती हैं। इसके बावजूद कुछ चिकित्सा संस्थानों में तैनात डॉक्टर मरीजों को बाजार की महंगी ब्रांडेड कम्पनी की दवाएं लिख रहे हैं। इसका खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
इसके बारे में मेडीकल कॉलेज हमीरपुर के मैडीकल अधीक्षक डा देश राज शर्मा ने माना कि किन्ही कारणवश पिछले कुछ समय से प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि दो-तीन दिनों के भीतर यह ऑडिट करवा दिया जाएगा
