पवन धीमान, हमीरपुर
जिला के नादौन विधानसभा क्षेत्र के जोल सप्पड़ स्थित निर्माणाधीन डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के निर्माण कार्य से स्थानीय निवासियों की परेशानियाँ बढ़ती जा रही हैं। निर्माण कार्य कर रही आहलुवालिया कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा अत्यधिक मिट्टी और सीवरेज निर्माण के कारण स्थानीय लोगों के घरों तक पहुँच मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है, जिससे ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान कंपनी द्वारा फेंका गया बेस्ट मटेरियल और खुदाई की गई मिट्टी के कारण साई मोड़ से बन क्षेत्र की मुख्य सड़क पूरी तरह से धंस गई है। इसके चलते न केवल वाहनों का आवागमन बंद हो गया है, बल्कि आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस जैसे वाहनों का भी गाँव तक पहुँच पाना असंभव हो गया है। अब ग्रामीणों को किसी बीमार व्यक्ति को चारपाई या कंधों पर उठाकर लाने की नौबत आ रही है।

एक स्थानीय निवासी ने बताया, “इस निर्माण कार्य ने हमारे दैनिक जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। हमें अपने ही घर तक पहुँचने के लिए दूर घूमकर जाना पड़ रहा है, और वह वैकल्पिक मार्ग भी सुरक्षित नहीं है।”
ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी बार-बार की शिकायतों के बावजूद भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन और निर्माण कंपनी ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। निर्माण कार्य के दौरान कई स्थानीय लोगों की जमीनें भी निर्माण सामग्री के नीचे दब गई हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। अकैडमिक ब्लॉक के बाहर की सड़क भी पूरी तरह से धंस गई है, जिससे कॉलेज परिसर तक पहुँचने में भी कठिनाई हो रही है।
एक अन्य ग्रामीण ने कहा, “हमने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन उन्होंने हमारी एक नहीं सुनी। ऐसा लगता है कि उन्हें स्थानीय लोगों की परेशानियों की कोई परवाह नहीं है।”
यह चिंताजनक स्थिति तब है जबकि इस मेडिकल कॉलेज के मार्च 2026 तक पूर्ण रूप से तैयार होने की उम्मीद है । सरकार द्वारा इस परियोजना पर 600 करोड़ रुपये से भी अधिक की धनराशि पहले ही वितरित की जा चुकी है , और इसे विश्व स्तरीय सुविधाओं से युक्त करने की योजना है। परंतु स्थानीय लोगों का मानना है कि बुनियादी ढाँचे के निर्माण के दौरान ही स्थानीय जनता की उपेक्षा की जा रही है, जो भविष्य के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
इस मामले में स्थानीय प्रशासन द्वारा अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप करने और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करने की माँग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
निर्माण कंपनी और मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। स्थानीय निवासी अब जिला प्रशासन के हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान हो सके और उन्हें राहत मिल सके।
