प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता व सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि देश का सबसे बड़ा वोट चोरी और वोट फॉर कैश का मामला हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की धर्मपत्नी कमलेश कुमारी के चुनाव क्षेत्र देहरा में हुआ है।
आज यहां जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने कहा कि देहरा उपचुनाव में जब मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कमलेश कुमारी कांग्रेस प्रत्याशी थीं, तब मुख्यमंत्री ने चुनाव आचार संहिता के बीच कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के माध्यम से देहरा विधानसभा क्षेत्र के 67 महिला मंडलों के बैंक खातों में सीधे 50-50 हजार रुपये डलवाए। यही नहीं, समाज कल्याण विभाग के जरिए इस क्षेत्र की 990 महिलाओं को 4500-4500 रुपये यह कहकर दिए गए कि कांग्रेस अपने चुनावी घोषणा पत्र के वादे के मुताबिक हर महिला को ₹1500 महीना दे रही है और 3 महीने की राशि एकमुश्त दी जा रही है।
राणा ने कहा कि यह पूरा खेल सिर्फ चुनाव जीतने के लिए खेला गया। सबूत इस बात के गवाह हैं कि चुनाव के बाद न तो महिला मंडलों को कोई राशि मिली और न ही उन 990 महिलाओं को दोबारा कोई किस्त दी गई। इसका मतलब साफ है कि पैसा केवल वोट हथियाने के लिए बांटा गया।
पूर्व विधायक ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि इस सबसे बड़ा सबूत यह है कि कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक का प्रभार खुद मुख्यमंत्री के पास है और उन्हीं के इशारे पर चुनावी आचार संहिता के दौरान करोड़ों रुपये बांटे गए। उन्होंने कहा कि विधानसभा में इस मामले पर दो बार सवाल पूछा गया, लेकिन सरकार बार-बार यही कहकर पल्ला झाड़ती रही कि “सूचना एकत्रित की जा रही है” जबकि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सारी जानकारी उजागर हो चुकी है और सोशल मीडिया पर भी घूम रही है।
राजेंद्र राणा ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल की मित्रों वाली सरकार छोटे-छोटे मामलों पर तो विपक्षियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करवा देती है, लेकिन जब मुख्यमंत्री खुद वोट फॉर कैश के कटघरे में हैं, तब उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
उन्होंने कहा कि देहरा उपचुनाव तुरंत रद्द होना चाहिए क्योंकि कांग्रेस सरकार ने खुलेआम पैसों की ताकत से चुनावी नतीजे पलटे हैं। कांग्रेस पूरे देश में वोट चोरी का शोर मचा रही है, लेकिन सबसे बड़ी वोट चोरी तो खुद हिमाचल के देहरा विधानसभा क्षेत्र में हुई है।
