प्राकृतिक खेती की ओर किसानों का कदम जायका परियोजना के तहत गोहर इकाई द्वारा वितरित की गई न्यूट्री किचन गार्डन किट्स

हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण–II) के तहत गोहर ब्लॉक परियोजना प्रबंधन इकाई द्वारा किसानों को न्यूट्री किचन गार्डन किट्स वितरित की जा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि परिवारों को शुद्ध, ताज़ी और पोषक सब्जियां घर पर ही उपलब्ध हो सकें।

 

ब्लॉक परियोजना प्रबंधक डॉ नरेन्द्र कुमार ने बताया कि इन किट्स में मौसमी सब्जियों के बीज शामिल हैं। किसानों को बीज बुवाई, पौधों की देखभाल, सिंचाई के तरीकों तथा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के उपायों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। गोहर इकाई ने एफआईएस गवाड़, सुरथी–थाची, गद्दीमन–मझोठी, खरखन खड्ड–लेहोटी, देओली–देलग टिक्करी, कंसा खड्ड–पलहोटा, नोगी खड्ड–काण्डलू, काण्डलू–बिठरी, गवार–मस्वारी, सन्दोआ, शनि मंदिर–पंचक्कर और बढारनु–गिरजनू में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

 

स्वास्थ्य और पर्यावरण सुधार की दिशा में पहल

 

डॉ नरेन्द्र कुमार ने बताया कि न्यूट्री किचन गार्डन योजना से ग्रामीण परिवारों को न केवल स्वास्थ्यवर्धक आहार मिलेगा, बल्कि रासायनिक उत्पादों पर निर्भरता भी घटेगी। किसानों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अब वे अपने घरों में किचन गार्डन तैयार कर स्वावलंबन की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी, जल और पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार होता है, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए टिकाऊ कृषि व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है।

 

परियोजना का व्यापक प्रभाव

 

डॉ कुमार ने बताया कि हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना के अंतर्गत पूरे प्रदेश में अब तक 306 उप परियोजनायें संचालित की जा चुकी हैं, जिनसे लगभग 8,000 हेक्टेयर भूमि और करीब 30,000 किसान परिवार जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक पद्धति से खेती को लाभदायक, स्वास्थ्यवर्धक और पर्यावरण–अनुकूल बनाना है। भविष्य में न्यूट्री किचन गार्डन कार्यक्रमों को और अधिक गांवों में विस्तारित किया जाएगा, ताकि हिमाचल प्रदेश को जैविक खेती और स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में अग्रणी राज्य बनाया जा सके।

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Author: powan dhiman

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