हिमाचल प्रदेश परिवहन निगम (एचआरटीसी) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों का आक्रोश सरकार के खिलाफ एक बड़े संघर्ष में तब्दील होता दिख रहा है। सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण मंच के कार्यकारी अध्यक्ष अजमेर सिंह ठाकुर ने राज्य सरकार पर अपने वेतन और भत्ते बढ़ाने के लिए तो पैसा होने, लेकिन कर्मचारियों की जायज मांगों पर ध्यान न देने का गंभीर आरोप लगाया है।
ठाकुर ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जल्द ही उनकी बात सुनने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए बैठक नहीं बुलाई, तो उनकी अगली कार्रवाई और भी कड़ी होगी। इस रणनीति के तहत मंच के प्रतिनिधि राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेंगे और राष्ट्रपति से मिलकर हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग करेंगे।
अजमेर सिंह ठाकुर ने कहा, “यह सरकार दोहरे मापदंड अपना रही है। अपने मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के वेतन-भत्ते बढ़ाने के लिए उनके पास फंड है, लेकिन उन कर्मचारियों के लिए कुछ भी नहीं है जिन्होंने अपना जीवन इस निगम की सेवा में लगा दिया। यह हमारे साथ अन्याय है।” उन्होंने आगे कहा कि पेंशन और अन्य मुद्दों पर लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों की यह धमकी राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर सकती है। विपक्षी दलों द्वारा सरकार पर कर्मचारियों के हितों की अनदेखी करने के आरोपों का फायदा उठाए जाने की पूरी संभावना है। वहीं, सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। अगर सरकार ने इस मामले को संजीदगी से नहीं लिया, तो न केवल सेवानिवृत्त कर्मचारी बल्कि वर्तमान कर्मचारी भी आंदोलन के रास्ते पर उतर सकते हैं।
अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री सुक्खू पर टिकी हैं कि वह इस संकट को टालने के लिए कोई पहल करते हैं या नहीं। दूसरी ओर, एचआरटीसी मंच ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं और वे सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। अगले कुछ दिनों में यह तय होगा कि यह विवाद वार्ता की मेज पर सुलझेगा या फिर राज्य में एक नया राजनीतिक तूफान खड़ा होगा।
