पवन धीमान, हमीरपुर
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिले हमीरपुर में युवाओं को रोजगार देने के दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ा अंतर सामने आया है। जहाँ एक ओर सरकार युवाओं को विदेशों तक में नौकरियाँ दिलाने की बात कर रही है, वहीं नगर निगम द्वारा पहले से रिटायर हो चुके कर्मचारियों को फिर से डेली बेस पर नियुक्त करने का मामला सामने आया है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकारी नौकरियों में युवाओं के लिए वास्तव में नई जगह बन रही है, या फिर पुराने तंत्र को ही बरकरार रखा जा रहा है।
*विस्तृत विवाद: दो सेवानिवृत्त अधिकारियों को मिला कार्यकाल का विस्तार*
जानकारी के मुताबिक, नगर निगम हमीरपुर ने लेखा एवं चुनाव जैसे संवेदनशील विभागों में दो ऐसे कर्मचारियों को डेली वेज पर फिर से नियुक्त किया है, जो पिछले दो साल से अधिक समय पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ये दोनों पद आमतौर पर ‘मालदार’ माने जाते हैं, जहाँ अच्छी कमाई के अवसर होते हैं। इस कारण यह आरोप लग रहा है कि संसाधनों की कमी का हवाला देकर युवाओं को रोजगार नहीं दिया जा रहा, जबकि सेवानिवृत्त कर्मियों को ही लाभ पहुँचाया जा रहा है।
इस मामले की पुष्टि पर नगर निगम के कमिश्नर राकेश शर्मा ने कहा कि उनके पास स्टाफ की कमी है, इसीलिए अनुभवी हाथों की जरूरत को देखते हुए यह कदम उठाया गया।
इस घटना ने सरकार की रोजगार नीतियों पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। सरकार लगातार युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के प्रयासों का दावा करती रही है।
हालाँकि, विपक्षी भाजपा इन दावों पर सवाल उठा रही है। पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी विक्रमजीत सिंह ने कहा कि यह घटना सरकार के “युवाओं को पाँच लाख रोजगार” के वादे और उसकी वास्तविकता के बीच के अंतर को उजागर करती है। उन्होंने माँग की कि सरकार एक श्वेत पत्र लाकर बताए कि अब तक कितने युवाओं को स्थायी रोजगार दिया गया है।
इससे पहले, 2 दिसंबर को विधानसभा परिसर में भाजपा विधायकों ने सरकार की ‘जॉब ट्रेनी’ नीति के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए इसे “युवा विरोधी” बताया था। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया था कि सरकार केवल “मित्र” योजनाओं के तहत भर्ती करके अपने चहेतों को फायदा पहुँचा रही है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने हाल ही में विधानसभा में कहा था कि दो साल का कार्यकाल पूरा करने वाले जॉब ट्रेनी कर्मचारियों को स्थायी किया जाएगा और उनकी परीक्षा पदोन्नति की तर्ज पर ली जाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि हमीरपुर चयन बोर्ड को भ्रष्टाचार का अड्डा बताते हुए भंग करके राज्य चयन आयोग बनाया गया है।
लेकिन, हमीरपुर नगर निगम का यह मामला एक अलग ही कहानी कहता है, जहाँ नए युवाओं को अवसर देने के बजाय पहले से रिटायर कर्मचारियों पर निर्भरता बढ़ रही है। यह स्थिति इस सवाल को जन्म देती है कि क्या सरकारी तंत्र में सचमुच नए खून के लिए जगह है, या फिर पुराने ढर्रे को ही नए तरीके से चलाया जा रहा है।
नगर निगम के इस फैसले से स्थानीय युवाओं में नाराजगी है, जो सरकारी नौकरियों में अपने लिए अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सरकार के पास अब इस सवाल का जवाब देना बाकी है कि क्या रिटायर कर्मचारियों को एक्सटेंशन देने की नीति जारी रहेगी, या फिर युवाओं को प्राथमिकता देने के अपने वादे को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएँगे।
