पवन धीमान, हमीरपुर। जनता के पैसे को लूटने और सरकारी संसाधनों को बर्बाद करने की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो इस पूरे तंत्र की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार को बेनक़ाब करती है। ग्राम पंचायत साहणवीं में कुनाह खड्ड पर पुल बनाने के नाम पर आवंटित सैकड़ों बोरी सरकारी सीमेंट आज पत्थर बन चुका है, लेकिन न पंचायत प्रतिनिधि जिम्मेदारी ले रहे हैं और न ही सम्बंधित विभाग के अधिकारी कोई कार्रवाई कर रहे हैं।
क़रीब 100 बोरी सीमेंट, जो पुल निर्माण के लिए जारी किया गया था, वह सालों से समसान घाट के विश्राम गृह में पड़ा है। समय बीतने के साथ वह सीमेंट अब जमकर चट्टान में तब्दील हो गया है। यह पूरा मामला सिर्फ़ लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी ख़जाने की जानबूझकर की गई बर्बादी और धोखाधड़ी की कहानी बयाँ करता है। आश्चर्य तो इस बात का है कि पुल तो दूर, वहाँ एक पत्थर तक नहीं लगाया गया।
इस मामले की तह तक पहुँचने के लिए जब हमारे संवाददाता ने ग्राम पंचायत प्रधान से सम्पर्क करना चाहा, तो उनका फ़ोन 15-20 बार कॉल करने के बाद भी अनुत्तरित रहा। पंचायत घर का दरवाज़ा भी ताला लगा मिला। ऐसा लगता है मानो पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच मौन सहमति बनी हुई है कि जनता के पैसे की लूट का यह खेल बिना किसी सवाल के चलता रहे।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक भोरंज कुलवंत ने बताया कि मामला उनके ध्यान में है और सम्बंधित जूनियर इंजीनियर को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। दोषियों से रिकवरी भी की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि जब सीमेंट आवंटित किया गया था, तब निगरानी तंत्र सोया क्यों था? क्या यह ज़िम्मेदारी विभाग की नहीं बनती कि वह देखे कि सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है या नहीं?
साहणवीं की यह घटना कोई अकेली नहीं है। यह तो उस पूरे तंत्र की पोल खोलती है, जहाँ जनता के टैक्स के पैसे से खरीदी गई सामग्री बिना इस्तेमाल के सड़ने-गलने के लिए छोड़ दी जाती है। ठेकेदार, अधिकारी और चुने हुए प्रतिनिधि मिलकर एक ऐसा चक्र चलाते हैं, जिसमें अंततः नुक़सान आम जनता का होता है।
कब तक चलेगा यह तमाशा? कब तक हम अपनी मेहनत की कमाई को इस तरह बर्बाद होते देखते रहेंगे? साहणवीं का यह पत्थर बना सीमेंट सिर्फ़ एक इमारती सामग्री नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की बिगड़ती सेहत और प्रशासनिक बेरुख़ी का पुख़्ता सबूत है। अब समय आ गया है कि जनता जागे और ऐसे हर मामले में सख़्त कार्रवाई की माँग करे।
