सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेन्द्र राणा की राजनीति एक बार फिर नकारात्मक सोच और कुंठा का परिचय देती नजर आ रही है। यह बात कांग्रेस नेता विवेक कटोच ने कही । उन्होंने कहा कि वर्षों से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ही नहीं, बल्कि पूर्व में रहे सभी मुख्यमंत्रियों जयराम ठाकुर, वीरभद्र सिंह और प्रेम कुमार धूमल से चिढ़ और ईर्ष्या रखने वाले राणा अब इस हद तक गिर चुके हैं कि उन्हें प्रदेश में कार्य कर रहे सरकारी अधिकारियों की पदोन्नति भी रास नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में राजेन्द्र राणा द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत कुछ सरकारी अधिकारियों की पदोन्नति पर सवाल उठाकर अनावश्यक हंगामा खड़ा करने की कोशिश की गई। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है पदोन्नति कोई राजनीतिक कृपा नहीं होती है बल्कि उसके लिए संवैधानिक और विभागीय प्रक्रिया है
विवेक कटोच ने कहा कि यह सर्वविदित तथ्य है कि किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की पदोन्नति विभागीय नियमों, वरिष्ठता, सेवा शर्तों और योग्यता के आधार पर होती है। यह प्रक्रिया विभागीय प्रमोशन कमेटी (DPC) के माध्यम से पूरी तरह पारदर्शी तरीके से की जाती है, जिसमें अधिकारी का सर्विस रिकॉर्ड , एसीआर , एलिजिबिलिटी और अनुभव विस्तार से देखा जाता है। यदि कोई अधिकारी मुख्यमंत्री कार्यालय या किसी अन्य संवैधानिक संस्थान में कार्यरत है, तो उसे पदोन्नति मिलना उसका कानूनी और व्यक्तिगत अधिकार है। इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता।
कांग्रेस नेता विवेक कटोच ने कहा कि राजेन्द्र राणा जिस तरह से शोर मचा रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को सीधे सरकारी कुर्सियों पर बैठा दिया गया हो, जो कि सरासर झूठ और भ्रम फैलाने की कोशिश है।राजेन्द्र राणा की राजनीति केवल पुत्र मोह और निजी स्वार्थ तक सीमित रह गई है उनकी एकमात्र चिंता अपने पुत्र अभिषेक की “प्रमोशन ” को लेकर रहती है। जिस पार्टी या मंच से उनके पुत्र को आगे बढ़ाने की गारंटी नहीं मिलती, उस पार्टी में राणा का दम घुटने लगता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यही कारण है कि जब भी किसी भी सरकारी अधिकारी को उसके अधिकार के अनुसार पदोन्नति मिलती है, तो राणा को उसमें भी साजिश नजर आने लगती है। हकीकत यह है कि जिन अधिकारियों की पदोन्नति हुई है, वे सभी पहले से ही सरकारी सेवा में कार्यरत अनुभवी अधिकारी हैं। किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता को न तो सरकारी अधिकारी बनाया गया है और न ही उसे पदोन्नत किया गया है। इसके बावजूद जानबूझकर भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि राजेन्द्र राणा की राजनीति का मकसद अब सिर्फ और सिर्फ सुर्खियों में बने रहना, बेवजह विवाद खड़ा करना और दूसरों की छवि खराब करना रह गया है। झूठे आरोप, बिना तथ्यों के बयान और गैर-जिम्मेदाराना भाषा अब उनकी पहचान बन चुकी है। यह न तो एक पूर्व विधायक को शोभा देता है और न ही लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि राजेन्द्र राणा को वास्तव में किसी पदोन्नति प्रक्रिया पर संदेह है, तो उन्हें चाहिए कि वे ठोस सबूत और दस्तावेजों के साथ सामने आएं। केवल बयानबाजी और आरोप लगाकर अधिकारियों की साख पर सवाल उठाना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। अन्यथा उन्हें उन सभी सरकारी अधिकारियों और प्रदेश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि जानबूझकर भ्रम और अस्थिरता फैलाने का प्रयास किया है।
