जिले में चार साल से चल रहे राष्ट्रीय राजमार्ग-03 के निर्माण को लेकर प्रभावित ग्रामीणों का आक्रोश अब फूट पड़ा है। थाना दरोगण व दरकोटी पंचायत के ग्रामीणों ने सोमवार रात निर्माण कार्य को जबरदस्ती रुकवा दिया और प्रशासन व कंपनी को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे के भीतर गांव के रास्तों व पुलियों का निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो वे बड़े आंदोलन के साथ राजमार्ग को पूरी तरह बंद कर देंगे।


ग्रामीणों का कहना है कि लगभग चार वर्षों से चल रहे इस निर्माण कार्य में आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर इस परियोजना पर काम करने वाली कंपनी कौन है और उसका जवाबदेह अधिकारी कौन। कर्मचारी बदलते रहते हैं, जवाबदेही तय नहीं है। यही अनिश्चितता और उपेक्षा उनके गुस्से का मुख्य कारण बनी हुई है।
गुस्साए ग्रामीणों ने सोमवार देर रात तब निर्माण कार्य रोक दिया, जब कंपनी द्वारा रात के सन्नाटे में सड़क को पक्का करने का प्रयास किया जा रहा था। ग्रामीणों ने ठोस रुख दिखाते हुए कहा कि जब तक गांव की पहुंच मार्ग व पुलियों का निर्माण नहीं होगा, तब तक राजमार्ग का काम आगे नहीं बढ़ने देंगे।
दरोगंण पंचायत के प्रधान संजीव कुमार ने साफ कहा, “पुराने रास्ते का पुनर्निर्माण हमारी प्राथमिकता है। जब तक ऐसा नहीं होता, NH-3 का काम पूरी तरह बंद रहेगा। हमने दो दिन का अल्टीमेटम दिया है।” वहीं, दरकोटी पंचायत की महिला मंडल प्रधान संतोष कुमार ने आशंका जताई, “अगर सड़क पक्की कर दी गई, तो कंपनी चली जाएगी और गांव के रास्ते व पुलिया अधूरे रह जाएंगे। हमें इसकी इजाजत नहीं है।”
दोनों पंचायतों के ग्रामीण पूरी तरह एकजुट हैं। उनका कहना है कि यह लड़ाई उनके अधिकारों और गांव के भविष्य के लिए है। मंगलवार को मौके पर न तो कोई अधिकारी मौजूद था और न ही निर्माण कार्य। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ग्रामीणों ने फैसला कर लिया है कि अब वे ठोस कार्रवाई के बिना पीछे नहीं हटेंगे।
हमीरपुर का यह संघर्ष सिर्फ एक सड़क निर्माण का मामला नहीं, बल्कि विकास परियोजनाओं में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और उनकी बुनियादी जरूरतों की अनदेखी का प्रश्न बन गया है। ग्रामीणों का 48 घंटे का अल्टीमेटम प्रशासन और निर्माण कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती है। अगर जल्द ही संवाद और ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो यह विवाद बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
