बीती रात से शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में बारिश और भारी बर्फबारी का दौर देखने को मिला है। कुमारसैन सहित आसपास के ऊँचाई वाले इलाकों में हुई बर्फबारी से किसानों और बागवानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। लगभग पाँच महीने के लंबे सूखे के बाद हुई इस बारिश और बर्फबारी ने क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत दी है।
बारिश व बर्फबारी के बाद अब किसान अपने बागीचों में सेब, नाशपाती सहित अन्य फलों के पौधों की रोपाई का कार्य कर सकेंगे। लंबे समय से नमी की कमी के कारण प्रभावित फसलों को लेकर जो चिंता बनी हुई थी, अब उनमें बेहतर उत्पादन की उम्मीद फिर से जाग उठी है।
इस अवसर पर समाजसेवी नमन वर्मा ने समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि जिस बारिश और बर्फबारी का इंतजार हमें इतने लंबे समय तक करना पड़ा, वह कहीं न कहीं मानव द्वारा किए गए पर्यावरणीय नुकसान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जंगलों में आग लगाना, अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और प्रकृति के प्रति लापरवाही आज मौसम असंतुलन का बड़ा कारण बन रही है।
नमन वर्मा ने कहा कि मकान बनाने और अन्य कार्यों के लिए पेड़ काटने में लोग आगे रहते हैं, लेकिन पेड़ लगाने के प्रति उदासीनता दिखाई देती है। यदि 10 वर्ष पहले ही समाज पर्यावरण को लेकर जागरूक हो गया होता, तो आज इस तरह के हालात पैदा नहीं होते।
उन्होंने कहा कि अभी भी समय है कि हम सभी जागरूक बनें, अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाएं, जंगलों में आग न लगाएं और बेजुबान पशुओं व प्रकृति का संरक्षण करें। यदि समाज ने अभी भी जिम्मेदारी निभाई, तो भविष्य में बारिश और बर्फबारी के लिए लंबे इंतजार की समस्या से बचा जा सकता है।
