ख़रीद की तारीख़ें ध्यान से देख लीजिए — ज़्यादा शर्मिंदा न होना पड़े, इसलिए पहले ही आगाह कर रहे हैं।
यह महज़ ट्रेलर है, पूरी फ़िल्म अभी बाक़ी है।
तारीख़ें खुद बता देंगी कि उस समय सरकार कौन चला रहा था।
क़र्ज़ किसने लिया, और 28 करोड़ रुपये की सरकारी गारंटी किसके इशारे पर दी गई — इसका जवाब भी उन्हीं तारीख़ों में छिपा है।
2019 और 2021 के भुगतान देखने के लिए किसी विशेष चश्मे की ज़रूरत नहीं है, सब कुछ साफ़ और दर्ज है।
मामले की विजिलेंस जाँच चल रही है, इसलिए ज़्यादा बोलना फिलहाल ज़रूरी नहीं।
लेकिन इतना ज़रूर याद रखा जाए —
“शीशे के घरों में रहने वाले, दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते।”
