बांग्लादेश में गुरुवार, 12 फरवरी को हुए आम चुनाव
देश की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माने जा रहे हैं। यह चुनाव जुलाई 2024 में छात्रों के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद पहला आम चुनाव है। उन प्रदर्शनों के चलते 15 वर्षों से सत्ता में रही शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार ने चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने ढाका के एक मतदान केंद्र पर 13वें संसदीय चुनाव के लिए अपना वोट डाला। चुनाव में खासतौर पर युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में पहली बार वोट डालने वाले युवा मतदान केंद्रों पर पहुंचे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की।
एक 27 वर्षीय युवा मतदाता ने कहा कि यह उनके जीवन का पहला मतदान है। उन्होंने बताया कि पिछले 17 वर्षों में उन्हें वोट देने का अवसर नहीं मिला था, इसलिए यह अनुभव उनके लिए बेहद खास है।
एक महिला मतदाता ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह बहुत सकारात्मक महसूस कर रही हैं। उनके अनुसार देश में सुधार (रिफॉर्म्स) की सख्त जरूरत है, क्योंकि अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कमियां लंबे समय से समस्या बनी हुई हैं।
एक अन्य मतदाता ने कहा कि इस बार वे बिना किसी डर या झिझक के मतदान कर पाए, जो उनके लिए एक नया और संतोषजनक अनुभव था।
राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस चुनाव को ऐतिहासिक बताते हुए मतदाताओं, विशेषकर युवाओं की भागीदारी की सराहना की। कई नेताओं ने उम्मीद जताई कि नई सरकार देश में स्थिरता, पारदर्शिता और संस्थागत सुधार लाने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी। कुछ विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया तथा जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की बात कही।
कुल मिलाकर, इस चुनाव में युवाओं की सक्रिय भागीदारी और बदलाव की उम्मीद ने बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नई दिशा देने का संकेत दिया है। अब सबकी नजरें चुनाव परिणामों और नई सरकार की नीतियों पर टिकी हैं।
