हमीरपुर, पवन धीमान:
लोगों की सहूलियत और देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बनाया जा रहा राष्ट्रीय राजमार्ग-03 अब खुद लोगों के लिए खतरा बनता जा रहा है। वर्ल्ड बैंक की सैकड़ों करोड़ की फंडिंग के बावजूद यह हाईवे न तो सुरक्षित बन पाया है और न ही तय समय में पूरा हो सका है।
पिछले करीब पांच वर्षों से चल रहे निर्माण कार्य ने लोगों को राहत देने के बजाय परेशानी ही दी है। अब जब कंपनी दावा कर रही है कि काम लगभग पूरा हो चुका है, तो हल्की बारिश ने ही इस दावे की पोल खोल दी है।
खतरे में सफर, हर पल हादसे का डर
टोनी देवी पुलिस चौकी के पास बाईपास निर्माण के दौरान पहाड़ को लगभग 90 डिग्री पर काट दिया गया। नतीजा—ऊपर से लगातार पत्थर गिर रहे हैं। इस वजह से यहां से गुजरना छोटे-बड़े सभी वाहन चालकों के लिए जोखिम भरा बन चुका है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
गुणवत्ता पर सवाल, ढह रहे डंगे
बारिश के बाद कई जगहों पर डंगे (रिटेनिंग वॉल) गिर चुके हैं, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि मिट्टी के ऊपर ही तारकोल बिछाकर काम पूरा दिखाने की कोशिश की जा रही है।
निगरानी एजेंसियों की भूमिका पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस प्रोजेक्ट की निगरानी करने वाली एजेंसियां आखिर क्या कर रही हैं? यदि निरीक्षण सही तरीके से हो रहा होता, तो इस तरह की लापरवाही सामने क्यों आती?
जनता पूछ रही जवाब
लगातार हो रही दुर्घटनाओं और खामियों के बीच अब लोगों का सवाल सीधा है—
👉 क्या यह सड़क सुविधा देने के लिए बनाई जा रही है या लोगों की जान लेने के लिए?
👉 करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हो रही?
जब तक जिम्मेदार एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक यह राजमार्ग लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि खतरा
ही बना रहेगा।
