जिला मुख्यालय पर दशकों से समाज सेवा और कल्याण कार्यों में अग्रणी भूमिका निभा रही सीनियर सिटीजन काउंसिल के चुनाव में अप्रत्याशित गहमागहमी और उसके बाद चुनाव का स्थगित होना न केवल संस्था के लिए, बल्कि समाज सेवा से जुड़े सभी संगठनों और व्यक्तियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यह घटनाक्रम सेवा क्षेत्र के लिए भी किसी शुभ संकेत की ओर इशारा नहीं करता।
यह संस्था वर्षों से जिला के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान में मरीजों और उनके तीमारदारों को दिन में तीन समय भोजन उपलब्ध करवाती आ रही है। साथ ही, जरूरतमंदों को अस्पताल में निशुल्क रात्रि विश्राम के लिए बिस्तरों की सुविधा भी प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, संस्था ने समाज सेवा के कई अन्य क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है।
समय के साथ संस्था के पास करोड़ों की संपत्ति और नकदी भी संचित हुई है, जिसमें जिले के सैकड़ों वरिष्ठ नागरिकों का स्वैच्छिक योगदान शामिल है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं इस गहमागहमी के पीछे संस्था की संपत्ति और संसाधनों पर किसी की नजर तो नहीं?
यह संस्था न केवल जिले में, बल्कि पूरे प्रदेश में एक प्रतिष्ठित और अनुकरणीय संगठन के रूप में जानी जाती है। ऐसे में हाल ही में देखने को मिला प्रशासनिक और राजनीतिक हस्तक्षेप न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में कार्यरत लोगों को हतोत्साहित करने वाला भी है।
यह भी एक सच्चाई है कि जो कार्य यह संस्था वर्षों से कर रही है, वह हमीरपुर अस्पताल में सरकारें भी पूरी तरह से नहीं कर पाईं। ऐसे में सरकार, प्रशासन और सभी राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे इस संस्था में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचें और इसके कार्यों को प्रोत्साहित करें, ताकि सेवा का यह सिलसिला निर्बाध रूप से जारी रह सके।
निस्वार्थ सेवा के लिए किसी प्रशासनिक दखल की आवश्यकता नहीं होती—यह बात सीनियर सिटीजन काउंसिल ने दशकों से सिद्ध की है।
अतः यह आवश्यक है कि संस्था के सभी सदस्य राजनीतिक और निजी महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर सर्वसम्मति से ऐसे प्रतिनिधियों का चयन करें, जो सच्चे सेवा भाव से कार्य करें। यही इस मानवता के पुनीत कार्य को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा त्याग और समर्पण होगा।
