जिला हमीरपुर के विकास खंड भोरंज ग्राम पंचायत ताल एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में सामने आई ऑडिट रिपोर्ट ने पंचायत में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और प्रक्रियागत लापरवाही की परतें खोल दी हैं। रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों से साफ संकेत मिलता है कि नियमों को दरकिनार कर लाखों रुपये के गड़बड़झाले को अंजाम दिया गया।
ऑडिट के अनुसार, Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (मनरेगा) के तहत लगभग ₹3.99 लाख का भुगतान बिना तकनीकी मूल्यांकन, सत्यापन और पे-ऑर्डर के ही जारी कर दिया गया। “फ्रूट प्लांटेशन पब्लिक सेक्टर दिओट” कार्य में ₹3,93,854 की राशि सीधे जारी कर दी गई, जबकि नियमानुसार कार्य का पहले मूल्यांकन होना आवश्यक था।
अंकेक्षण में यह भी सामने आया कि माप पुस्तिकाओं (एमबी) के नंबर और पृष्ठ रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते, जिससे दस्तावेजी प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इसके अलावा “एम्बुलेंस रोड पीर बाबा से कऊ शैड” निर्माण कार्य में भी नियमों की अनदेखी सामने आई, जहां बिना आवश्यक सत्यापन के ₹5,544 का भुगतान कर दिया गया।
खनन सामग्री की खरीद में भी गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। बिना ट्रांजिट पास (फॉर्म ‘W’ या ‘X’) के करीब ₹7.79 लाख का भुगतान किया गया, जो स्पष्ट रूप से नियमों के विरुद्ध है।
अंकेक्षण विभाग ने अपने निष्कर्ष में कहा है कि या तो इन भुगतानों को वैध दस्तावेजों के साथ सही ठहराया जाए या संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने प्राथमिक स्तर पर रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।: रिकॉर्ड में भी संदिग्ध एंट्री
पंचायत के पुराने रिकॉर्ड खंगालने पर एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दस्तावेजों में उप-प्रधान के नाम पर मनरेगा मस्टरोल में दिहाड़ी दर्ज की गई है। हैरानी की बात यह है कि जिस दिन पंचायत बैठक में उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं, उसी दिन उन्हें मनरेगा में काम करते हुए भी दिखाया गया है। यह केवल एक बार नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग मस्टरोल में दोहराया गया है, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
