हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों के पूर्व प्रतिनिधियों के लिए चुनाव लड़ने के नियम कड़े किए जा सकते हैं। हिमाचल विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति ने स्पष्ट सिफारिश की है कि जिन व्यक्तियों के खिलाफ लेखा परीक्षण टिप्पणियों में देय राशि लंबित है, उन्हें नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी न किया जाए।
समिति ने सरकार को निर्देश देने का आग्रह किया है कि संबंधित व्यक्तियों को तभी NOC दी जाए, जब उनके विरुद्ध लंबित पूरी राशि की वसूली हो जाए। यह कदम वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
वसूली में ढिलाई पर नाराजगी
समिति ने लंबित लेखा आपत्तियों और अनियमित व्ययों की वसूली में हो रही देरी पर गहरी चिंता जताई।
आंकड़ों के अनुसार:
31 मार्च 2025 तक कुल ₹50.68 करोड़ की राशि वसूली योग्य थी
31 दिसंबर 2025 तक मात्र ₹2.09 करोड़ की वसूली/समायोजन हो पाया
अब भी ₹48.58 करोड़ की भारी राशि लंबित है
समिति ने इस प्रदर्शन को “असंतोषजनक” बताते हुए संबंधित विभागों पर नाराजगी जाहिर की।
बैठक में क्या हुआ
शुक्रवार को हिमाचल विधानसभा के मुख्य समिति कक्ष में आयोजित बैठक की अध्यक्षता संजय रत्न ने की।
बैठक में सदस्य संजय अवस्थी, मलेंद्र राजन और कुलदीप राठौर भी उपस्थित रहे।
समिति ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि:
लंबित मामलों पर त्वरित कार्रवाई करें
समिति की संस्तुतियों पर प्रगति रिपोर्ट तय समय में प्रस्तुत करे
समिति ने विभिन्न मुद्दों पर आगे की समीक्षा के लिए 26 मई 2026 को हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव का मौखिक साक्ष्य लेने का निर्णय भी लिया है।
संकेत साफ है: अब बकाया राशि के मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, और जवाबदेही तय करने के लिए चुनावी प्रक्रिया में भी सख्ती लागू की जाएगी।
