भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी इस फैसले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।

हमीरपुर जिला में जिला परिषद चुनावों के बीच भाजपा के अंदरूनी मतभेद एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं। नामांकन के आखिरी दिन ताल वार्ड में जो राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, उसने पार्टी संगठन से लेकर कार्यकर्ताओं तक को हैरान कर दिया। पहले से मजबूत दावेदार माने जा रहे अजय चंदेल और सुशील ठाकुर एसडीएम कार्यालय तक पहुंचे जरूर, लेकिन बिना नामांकन भरे ही वापस लौट गए। इसके बाद अचानक सुरेश सोनी के नाम पर सहमति बनती दिखाई दी।

 

सूत्रों की मानें तो पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान और स्थानीय स्तर पर बढ़ते दबाव ने भाजपा हाईकमान को अंतिम क्षणों में फैसला बदलने पर मजबूर कर दिया। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं को मनाने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन अंततः संगठन ने तीसरे चेहरे पर दांव खेल दिया।

 

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा सुशील ठाकुर की भावुकता को लेकर रही। मीडिया और समर्थकों के बीच उनकी नम आंखों ने कई सवाल खड़े कर दिए। हालांकि उन्होंने खुलकर कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके चेहरे के भाव राजनीतिक मजबूरियों और अंदरूनी दर्द को साफ बयान करते नजर आए।

 

भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी इस फैसले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। कई कार्यकर्ता इसे संगठन के भीतर गहराती गुटबाजी का संकेत मान रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पंचायत और जिला परिषद जैसे स्थानीय चुनावों में यदि इस तरह के विवाद सामने आते हैं, तो उसका असर बड़े चुनावों तक दिखाई दे सकता है।

 

विपक्ष ने भी इस मुद्दे को हाथोंहाथ लेते हुए भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विरोधी दलों का आरोप है कि भाजपा “संगठन में अनुशासन” की बात तो करती है, लेकिन टिकट वितरण में अंदरूनी संघर्ष लगातार उजागर हो रहा है।

 

फिलहाल ताल वार्ड में भाजपा की ओर से सुरेश सोनी का नाम आगे आया है, लेकिन चुनावी तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं मानी जा रही। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी कार्यकर्ता इस फैसले को कितनी सहजता से स्वीकार करते हैं और चुनावी मैदान में इसका क्या असर देखने को मिलता है।

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Author: powan dhiman

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