भोरंज विधानसभा क्षेत्र में भाजपा समर्थित जिला परिषद प्रत्याशी के नामांकन पत्र के रद्द होने से हड़कंप मच गया है। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह चुनावी नियमों के पालन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने बताया कि प्रत्याशी के खिलाफ अदालत में चल रहे मामले की जानकारी नामांकन पत्र में दर्ज नहीं की गई थी, जिसके चलते उन्होंने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई। शिकायतकर्ता के अनुसार, चुनावी नियमों के तहत प्रत्याशी के लिए सभी आवश्यक तथ्यों का उल्लेख करना अनिवार्य है और जानकारी छिपाने पर निर्वाचन अधिकारी को सख्त कार्रवाई का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यह मामला किसी व्यक्तिगत विरोध का नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए नियमों की अनिवार्यता से जुड़ा है।
वहीं, निर्वाचन अधिकारी शीशपाल ने पुष्टि करते हुए बताया कि प्रत्याशी द्वारा जमा नामांकन पत्र में गंभीर त्रुटियां पाई गईं और मांगी गई विस्तृत जानकारी पूरी तरह उपलब्ध नहीं करवाई गई थी, जिसके आधार पर नामांकन रद्द किया गया। इस फैसले के बाद भोरंज की सियासत गरमा गई है। भाजपा समर्थक नाराज दिख रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इसे नियमों की जीत बता रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि इसने साफ कर दिया है कि चाहे कोई भी प्रत्याशी हो, चुनावी नियमों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
