हमीरपुर जिला मुख्यालय पर आज दोपहर एक बड़ा हादसा टल गया, जब अचानक मेन रोड पर बीएसएनएल विभाग की फाइबर तार सड़क पर आ गिरी। सड़क के बीचोंबीच फैली इस तार के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और दोपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
स्थिति इतनी खतरनाक हो गई थी कि कई वाहन चालक बार-बार फिसलन और तार में उलझने के कारण संतुलन खोते-खोते बचे। वहीं एक कार के पिछले टायरों में तार बुरी तरह फंस गई, जिसके चलते चालक को काफी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकालना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते वाहन चालकों ने सतर्कता न दिखाई होती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
एक तरफ जिला प्रशासन लगातार “हमीरपुर को जंजाल मुक्त बनाने” की बात करता है, लेकिन दूसरी ओर शहर में बिजली और संचार विभागों की तारों का जाल अब भी लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। शहर के कई इलाकों में खंभों पर लटकती तारें हादसों को न्योता देती दिखाई दे रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि इस घटना में कोई गंभीर हादसा हो जाता तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती — बिजली विभाग की, जिनके खंभों पर ये तारें लगी हैं, या फिर संबंधित संचार विभाग की, जिनकी फाइबर लाइन सड़क पर गिरी?
हैरानी की बात यह रही कि घटना के काफी देर बाद तक संबंधित विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। हालांकि ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर यातायात व्यवस्था संभालने का प्रयास किया, लेकिन लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली कि जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदकर दफ्तरों में बैठा रहा जबकि सड़क पर लोगों की जान जोखिम में पड़ी हुई थी।
