हिमाचल प्रदेश की राजनीति में आगामी नगर निगम चुनावों से पहले बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रदेश सरकार ने सोलन, पालमपुर, मंडी और धर्मशाला नगर निगमों की महापौर (मेयर) सीटों को अगले पांच वर्षों के लिए अनारक्षित घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद अब किसी भी वर्ग, जाति या लिंग का पात्र उम्मीदवार इन सीटों से चुनाव लड़ सकेगा।

शहरी विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह निर्णय हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 तथा नगर निगम (निर्वाचन) नियम, 2012 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए लिया गया है। अधिसूचना पर प्रधान सचिव (शहरी विकास) देवेश कुमार के हस्ताक्षर हैं।
इस फैसले ने राजनीतिक दलों के भीतर हलचल बढ़ा दी है। अब तक आरक्षण की वजह से कई संभावित दावेदार चुनावी दौड़ से बाहर हो जाते थे, लेकिन सीटें अनारक्षित होने के बाद नए चेहरे और बड़े राजनीतिक खिलाड़ी मैदान में उतर सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे चुनावी मुकाबले और अधिक रोचक तथा प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।
विशेष रूप से सोलन, पालमपुर, मंडी और धर्मशाला में अब राजनीतिक दलों को उम्मीदवार चयन में नए समीकरण बनाने होंगे। कई ऐसे नेता, जो अब तक आरक्षण व्यवस्था के कारण दावेदारी नहीं कर पा रहे थे, उनके लिए भी रास्ता खुल गया है।
हालांकि इस फैसले को लेकर कुछ वर्गों ने आरक्षण समाप्त होने पर चिंता जताई है, लेकिन सरकार का कहना है कि यह निर्णय कानूनी प्रावधानों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिया गया है। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि इन चारों नगर निगमों में मेयर पद के लिए कौन-कौन से दिग्गज चेहरे चुनावी मैदान में उतरेंगे और जनता किस पर भरोसा जताएगी।
आगामी नगर निगम चुनावों में यह फैसला चुनावी रणनीतियों, टिकट वितरण और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है। अब सभी की नजरें राजनीतिक दलों की अगली चाल पर टिकी हैं।
