बड़सर पंचायत समिति में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव से पहले सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। 23 सदस्यीय समिति में 18 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बढ़त लेने वाली भाजपा के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर सक्रिय कथित ‘अंदरूनी खिलाड़ी’ बनते जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एक वरिष्ठ कथित भाजपा नेता की गतिविधियों ने पार्टी संगठन और समर्थकों की चिंता बढ़ा दी है।पंचायत समिति चुनाव परिणाम घोषित हुए आधे महीने से अधिक समय बीत चुका है। निर्वाचित सदस्यों का शपथ ग्रहण भी हो चुका है, लेकिन अब तक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की तिथि तय नहीं हो पाई है। चुनाव कार्यक्रम जारी न होने से राजनीतिक जोड़तोड़ और पर्दे के पीछे चल रही गतिविधियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बड़सर के अलावा सुजानपुर, हमीरपुर और नादौन पंचायत समितियों में भी अध्यक्षीय चुनाव की अधिसूचना का इंतजार बना हुआ है।सूत्रों के अनुसार, भाजपा के ही एक कथित नेता पर निर्वाचित सदस्यों को प्रभावित करने और उन्हें पार्टी लाइन से अलग जाने के लिए प्रेरित करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। चर्चा यह भी है कि विधानसभा उपचुनाव के दौरान भाजपा के समर्थन में मुखर दिखने वाला यही नेता पंचायत समिति चुनावों में कांग्रेस समर्थित रणनीति के साथ सक्रिय दिखाई दे रहा है।राजनीतिक सूत्र बताते है कि समिति के कुछ सदस्यों के साथ लगातार संपर्क साधकर समीकरण बदलने की कोशिशें की जा रही हैं। आरोप यह भी हैं कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों को लेकर ऐसे प्रस्ताव दिए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य भाजपा के घोषित बहुमत को कमजोर करना है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। बड़सर की राजनीति पर नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि यदि बहुमत खेमे में मामूली भी सेंध लगती है तो अध्यक्षीय चुनाव में अप्रत्याशित परिणाम सामने आ सकते हैं। यही कारण है कि भाजपा खेमे में संख्या बल होने के बावजूद बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। एक ओर विधायक इंद्रदत्त लखनपाल लगातार यह दावा कर रहे हैं कि पंचायत समिति में भाजपा समर्थित सदस्य मजबूत स्थिति में हैं और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष दोनों पदों पर पार्टी समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर कथित असंतुष्ट तत्वों की सक्रियता इन दावों को चुनौती देती नजर आ रही है। सियासी गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि चुनाव प्रक्रिया जितनी लंबी खिंचेगी, उतना ही जोड़तोड़, दबाव और समीकरणों के बदलने का खतरा बढ़ेगा। फिलहाल बड़सर पंचायत समिति का अध्यक्षीय चुनाव केवल संख्या बल की लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक निष्ठा, संगठनात्मक अनुशासन और अंदरूनी शक्ति प्रदर्शन की परीक्षा बनता जा रहा है। अब सबकी निगाहें निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी की जाने वाली अधिसूचना पर टिकी हैं। तिथि घोषित होते ही यह साफ हो जाएगा कि बड़सर में बहुमत का गणित जीतता है या फिर पर्दे के पीछे चल रहा सियासी खेल कोई नया मोड़ लेता है।
भाजपा का हीं एक नेता कांग्रेस प्रेम मे पंचायत समिति सदस्यों को प्रभावित करने व बरगलाने मे लगा हुआ है! जिसकी शिकायत संगठन को की गई है! बड़सर में पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्यों को प्रभावित एवं बरगलाने के प्रयासों को लेकर पार्टी के एक नेता के खिलाफ शिकायत सामने आई है। इस शिकायत को पार्टी हाईकमान को भेजा जा रहा है। इससे पहले भी उक्त नेता के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने की शिकायत हाईकमान तक पहुंच चुकी है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पार्टी नेतृत्व मामले को गंभीरता से ले रहा है और संबंधित नेता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रहा है।
