नाहन नगर परिषद चुनाव टला: भाजपा की रणनीति या अंदरूनी असमंजस? 24 जून को होगा सत्ता का फैसला

नाहन। नगर परिषद नाहन के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार मंगलवार को भी खत्म नहीं हो सका। कोरम पूरा न होने के कारण चुनाव प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी। भाजपा समर्थित पार्षद बैठक में नहीं पहुंचे, जबकि प्रशासन ने निर्धारित समय सुबह 11:30 बजे तक उनका इंतजार किया। इसके बाद चुनाव स्थगित होने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा की अनुपस्थिति के पीछे सबसे बड़ा कारण अध्यक्ष पद के उम्मीदवार को लेकर पार्टी के भीतर बनी असमंजस की स्थिति हो सकती है। नगर परिषद में भाजपा समर्थित सात पार्षद हैं, जिनमें पांच महिला पार्षद शामिल हैं। पार्टी अब तक इस बात पर सहमति नहीं बना सकी कि अध्यक्ष पद के लिए किस चेहरे पर दांव लगाया जाए।

सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष पद की दौड़ में संध्या अग्रवाल, पूजा तोमर और सीमा अत्री के नाम प्रमुखता से सामने आए, लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में भाजपा ने चुनावी मुकाबले में उतरने से पहले और समय लेना बेहतर समझा।

वहीं कांग्रेस ने चुनाव से ठीक पहले अपने पत्ते खोलते हुए उपमा धीमान को अध्यक्ष और वरिष्ठ पार्षद योगेश गुप्ता को उपाध्यक्ष पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट नजर आई, लेकिन भाजपा की अनुपस्थिति के कारण मुकाबला टल गया।

नगर परिषद में कुल 13 पार्षद हैं। इनमें भाजपा समर्थित 7 और कांग्रेस के 6 पार्षद हैं। हालांकि विधायक अजय सोलंकी के मतदान अधिकार को जोड़ने पर कांग्रेस का आंकड़ा भी 7 तक पहुंच जाता है। ऐसे में दोनों दलों के बीच संख्या बल का मुकाबला बराबरी का दिखाई देता है।

कार्यवाहक एसडीएम एवं तहसीलदार उपेंद्र ने कोरम के अभाव में चुनाव प्रक्रिया स्थगित करते हुए 24 जून सुबह 11 बजे अगली बैठक बुलाने की घोषणा की है। नियमानुसार अगली बैठक में साधारण बहुमत के आधार पर चुनाव कराया जा सकता है। ऐसे में यदि कुछ पार्षद अनुपस्थित भी रहते हैं तो उपस्थित सदस्यों के आधार पर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन संभव होगा।

नगर परिषद की सत्ता को लेकर पिछले कई महीनों से खींचतान जारी है। बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच अब सभी की नजरें 24 जून की बैठक पर टिक गई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपने उम्मीदवार पर सहमति बना पाती है या कांग्रेस इस मौके का राजनीतिक लाभ उठाने में सफल रहती है।

हालांकि जो भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुना जाएगा, उसके सामने विकास कार्यों को गति देने, जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और राजनीतिक दबावों के बीच संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी। विधानसभा चुनावों की आहट के बीच नाहन नगर परिषद की यह कुर्सी सत्ता का सुख कम और जिम्मेदारियों का कांटों भरा ताज अधिक नजर आ रही है। फिलहाल नाहन की राजनीति में सस्पेंस बरकरार है और सत्ता की इस बाजी का फैसला अब 24 जून को होगा।

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Author: powan dhiman

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