अस्पताल में महिला की मौत के मामले में डॉक्टर के निलंबन पर RDA का विरोध, आदेश जल्द वापस लेने की मांग

हमीरपुर,: क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में प्रसूता की उपचार के दौरान मृत्यु मामले को लेकर डॉक्टर के निलंबन के आदेश को आर.डी. ए. (रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन और फैकल्टी एसोसिएशन ने जल्द निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उनके चिकित्सकीय तथ्यों के अनुसार यह मामला एम्नियोटिक फ्लूइड एम्बोलिज़्म जैसी अत्यंत दुर्लभ, अचानक होने वाली तथा उच्च मृत्यु-दर वाली प्रसूति जटिलता का प्रतीत होता है। ऐसी स्थिति है समय पर एवं सर्वोत्तम चिकित्सा उपलब्ध होने के बावजूद भी कई बार रोगी को बचाया नहीं जा सकता।

आर. डी. ए.एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डा रजीत कुमार ने बताया कि उक्त घटना के उपरांत चिकित्सकों ने मृत्यु के वास्तविक कारण की वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम कराने का अनुरोध किया था, किंतु उपलब्ध जानकारी के अनुसार परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। ऐसी स्थिति में बिना वैज्ञानिक साक्ष्यों एवं विशेषज्ञ जांच के किसी भी चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाना या निष्कर्ष निकालना न्यायसंगत नहीं है।

 

एसोसिएशन निष्पक्ष, पारदर्शी एवं विशेषज्ञों द्वारा की जाने वाली जांच का पूर्ण समर्थन करते है। यदि जांच में किसी भी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही सिद्ध होती है तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए। किंतु जांच पूरी होने से पूर्व किसी चिकित्सक को दोषी ठहराना, जनभावनाओं अथवा किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव में दंडात्मक कार्रवाई करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

संगठन यह भी गहरी चिंता व्यक्त करता है कि किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद अस्पतालों का घेराव करना, चिकित्सकों के विरुद्ध भीड़ एकत्र करना तथा जांच पूरी होने से पहले दोष तय करने का प्रयास एक चिंताजनक प्रवृत्ति बनता जा रहा है। इससे न केवल निष्पक्ष जांच प्रभावित होती है, बल्कि अस्पतालों में भर्ती अन्य मरीजों की चिकित्सा सेवाएँ भी बाधित होती हैं और चिकित्सकों में भय का वातावरण उत्पन्न होता है।

 

फैकल्टी एसोसिएशन और रेसिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन विशेष रूप से यह मांग करता है कि विभागीय जांच पूर्ण होने तथा उसके निष्कर्ष सामने आने से पूर्व, जब तक किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही विधिवत् प्रमाणित नहीं हो जाती, तब तक संबंधित चिकित्सक का निलंबन तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच की दृष्टि से आवश्यक समझे, तो संबंधित चिकित्सक को जांच अवधि के दौरान प्रशासनिक अवकाश (Administrative Leave) अथवा अन्य गैर-दंडात्मक व्यवस्था पर रखा जा सकता है। मात्र आरोपों अथवा जनदबाव के आधार पर किया गया निलंबन प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। ऐसी कार्रवाई न केवल चिकित्सकों का मनोबल गिराती है, बल्कि उनमें भय और असुरक्षा का वातावरण भी उत्पन्न करती है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव अंततः आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। न्याय तथ्यों, वैज्ञानिक साक्ष्यों और विधिसम्मत जांच के आधार पर होना चाहिए, न कि भीड़ या दबाव की संस्कृति के आधार पर।

powan dhiman
Author: powan dhiman

error: Content is protected !!