हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर हमीरपुर की सिविल कोर्ट से एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश सामने आया है। सिविल जज टीना मल्होत्रा की अदालत ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL) किसी भी उपभोक्ता की सहमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाने के लिए बाध्य नहीं कर सकता और केवल स्मार्ट मीटर न लगवाने के आधार पर बिजली आपूर्ति भी नहीं काट सकता।
क्या है मामला?
यह मामला CMA रजिस्ट्रेशन नंबर 497/2026, जयमल सिंह बनाम SDO, HPSEBL लंबलू से संबंधित है। याचिकाकर्ता जयमल सिंह ने अदालत में बताया कि उनकी दुकान मोहल लंबलू, मौजा उगलता, तहसील एवं जिला हमीरपुर में स्थित है। उन्हें 17 अप्रैल 2026 को HPSEBL की ओर से नोटिस जारी किया गया था, जिसमें स्मार्ट मीटर न लगवाने पर बिजली कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई थी।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की कि स्मार्ट मीटर लगवाना स्वैच्छिक है, इसलिए बोर्ड को बिजली काटने या जबरन स्मार्ट मीटर लगाने से रोका जाए।
HPSEBL का पक्ष
HPSEBL ने अदालत में कहा कि राज्य सरकार की नीति के तहत व्यावसायिक परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। बोर्ड ने बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 55(1) का हवाला देते हुए कहा कि उचित मीटर के बिना बिजली आपूर्ति नहीं दी जा सकती।
अदालत की प्रमुख टिप्पणियां
4 जून 2026 को सुनवाई के बाद अदालत ने अंतरिम आदेश में कहा कि:
– सरकार की योजना के तहत स्मार्ट मीटर को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं कहा जा सकता।
– किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर लगाने के लिए डराकर या बिजली काटने की धमकी देकर मजबूर नहीं किया जा सकता।
– बिजली अधिनियम की धाराओं की ऐसी व्याख्या नहीं की जा सकती जिससे उपभोक्ता पर जबरन स्मार्ट मीटर थोपा जाए।
– HPSEBL को आदेश दिया गया कि याचिकाकर्ता की दुकान की बिजली पुराने मीटर के साथ आदेश की तारीख से 10 दिनों के भीतर बहाल की जाए। यह व्यवस्था मुकदमे के अंतिम निर्णय तक लागू रहेगी।
