चार गुना फीस बढ़ाकर दो गुना कम करने में मुख्यमंत्री माहिर : जयराम ठाकुर

शिमला : शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से काम करने वाली सुक्खू सरकार के क्रियाकलाप और फैसले हैरानी ही नहीं, धूर्तता से भरे हुए भी होते हैं। मुख्यमंत्री ‘सुख के नाम पर शुल्क की सरकार’ चला रहे हैं। सत्ता में आने के बाद से वह सुविधाओं के दाम बढ़ाने के प्रयोग कर रहे हैं। पहले वह सुविधाओं के शुल्क में बेतहाशा वृद्धि करते हैं और विरोध के बाद फीस में थोड़ी-बहुत कमी कर देते हैं। हाल ही में सरकार ने विश्वविद्यालयों में फीस में लगभग दो गुना तक की बढ़ोतरी कर दी। सरकार के इस कदम का भारी विरोध हुआ तो सरकार ने फीस में थोड़ी कमी कर दी। इसी तरह वह स्वास्थ्य सेवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और विभिन्न पात्रता परीक्षाओं में भी ऐसा कर चुके हैं। इसी तरह रेस्ट्रिक्टेड रोड के पास के लिए मुख्यमंत्री ने फीस 300 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दी। अगले साल यह फीस 15 हजार रुपये से घटाकर 8 हजार रुपये कर दी गई। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी बहुत सी सुविधाओं में भी मुख्यमंत्री ने इसी तरह का हथकंडा अपनाया। बसों के किराए और लगेज पॉलिसी, बिजली और सीमेंट के दाम बढ़ाने के मामले में भी सरकार ने इसी तरह का खेल खेला है। लेकिन मुख्यमंत्री को समझना चाहिए कि एक कल्याणकारी राज्य का काम जनता से टैक्स वसूलना ही नहीं, बल्कि उन्हें मूलभूत सुविधाएं देना भी होता है। इसलिए वह बढ़ाई गई फीस पर अभी भी पुनर्विचार करें।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि इसी तरह की ऊहापोह की स्थिति हर जगह है। समाचारों से पता चला है कि शिक्षा विभाग में अब तक किताबें नहीं मिली हैं, इसलिए अब बच्चे पीडीएफ से पढ़ाई करेंगे। यह अंतरिम व्यवस्था शिक्षा विभाग ने की है। यह बात कितनी हैरानी भरी है कि सत्र शुरू हुए इतना समय बीतने के बाद भी बच्चों के पास किताबें नहीं हैं। इसी तरह सीबीएसई स्कूलों में अभी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है, क्योंकि अभी नियम और शर्तें तय नहीं हो पाई हैं। बच्चे, अभिभावक और शिक्षक सभी असमंजस में हैं कि आगे क्या होने वाला है। कांग्रेसी नेताओं द्वारा मंचों से जोरदार भाषण दिए जा रहे हैं। स्वागत-अभिनंदन और वंदन कार्यक्रम तक हो चुके हैं। सीबीएसई स्कूलों के विज्ञापन पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है। अखबारों, होर्डिंग्स, सोशल मीडिया और ट्रांजिट मीडिया में प्रचार की भरमार है, लेकिन इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति कैसे करनी है, इसके बारे में सटीक और बेहतर योजना नहीं बनाई जा सकी है। शिक्षा मंत्री को आठ महीने से निर्मित भवन का उद्घाटन करने से आखिरी क्षणों में रोका जा रहा है, जबकि छात्र किराए के भवन में पढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री न जाने किस शुभ घड़ी का इंतजार कर रहे हैं। तीन साल से मुख्यमंत्री बच्चों को पीने के लिए स्टील की बोतल देने के नाम पर तालियां बजवा रहे हैं, लेकिन विभाग के पास बच्चों का सही आंकड़ा तक नहीं है। इस दौरान लाखों बच्चे मिडिल की पढ़ाई भी पूरी कर चुके हैं। ऐसी स्थिति आज इसलिए है, क्योंकि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर सरकार चलाने वाले मुख्यमंत्री बिना किसी सोच-विचार और तैयारी के ही काम कर रहे हैं।

 

*केंद्र से मिलने वाले सहयोग पर चुप्पी साधती है सुक्खू सरकार*

 

जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार से आए दिन प्रदेश को आर्थिक सहयोग मिलता है, लेकिन सुक्खू सरकार इस मामले में पूरी तरह चुप्पी साध लेती है। कहीं भी केंद्र सरकार का नाम तक नहीं लिया जाता। आज ही प्रदेश को वित्तीय स्थिति मजबूत करने, पूंजीगत व्यय तथा विकास कार्यों को गति देने के लिए अतिरिक्त कर हस्तांतरण के रूप में 996 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो 10 अगस्त को जारी किए जाने वाले सामान्य मासिक हस्तांतरण के अतिरिक्त हैं। इसके अलावा, एसडीआरएफ के तहत 193.5 करोड़ रुपये की सहायता भी आपदा से निपटने के इंतजाम के लिए मिली है। आपदा चेतावनी और न्यूनीकरण के लिए लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये के बाह्य सहायता प्राप्त प्रोजेक्ट भी स्वीकृत हैं, जिसका 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा ही दिया जाएगा। यदि सरकार ढंग से काम करे तो पीएमजीएसवाई में आपदा राहत और पुनर्निर्माण से जुड़े कार्यों को शामिल किए जाने से हिमाचल प्रदेश को प्रति वर्ष सैकड़ों करोड़ रुपये का लाभ होगा।

powan dhiman
Author: powan dhiman

error: Content is protected !!