कुछ लोगों के लिए धर्म महज आस्था है, लेकिन कुछ लोग अपनी आस्था को सेवा, संकल्प और समाज के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ देते हैं। सिरमौर जिले की कौलावालांभूड पंचायत की नवनिर्वाचित प्रधान कोमल रघुवंशी ऐसी ही एक मिसाल बनकर सामने आई हैं। कभी 108 एंबुलेंस में ईएमटी के रूप में आपात स्थिति में लोगों की जिंदगी बचाने के लिए दौड़ने वाली कोमल अब पंचायत की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ सावन में भगवान शिव की भक्ति के लिए करीब 300 किलोमीटर की पैदल कांवड़ यात्रा पर निकली हैं।
हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर कोमल अपने गांव लौट रही हैं। उनके कंधों पर 6-7 मटकियों में गंगाजल है और मन में एक ही संकल्प—अपने गांव के शिव मंदिरों में यह पवित्र जल अर्पित करना।
कोमल 2 अगस्त को अपने गांव से हरिद्वार के लिए रवाना हुई थीं। 3 अगस्त को हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर उन्होंने पैदल वापसी शुरू की। रोजाना करीब 25 से 30 किलोमीटर का सफर तय करते हुए वह शनिवार को सडोरा पहुंचने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं। उनका कहना है कि 9 अगस्त तक वह अपने गांव पहुंचकर कौलावालांभूड के शिव मंदिरों में गंगाजल अर्पित करेंगी।
संकल्प सिर्फ अपने लिए नहीं, पूरे सिरमौर के लिए
कोमल रघुवंशी के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। वह इसे समस्त सिरमौरवासियों और हिमाचल प्रदेश की सुख-शांति एवं समृद्धि के लिए समर्पित कर रही हैं।
उनका संकल्प है कि भगवान शिव की कृपा से हिमाचल और सिरमौर प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहें और प्रदेश में किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो।
इस कठिन यात्रा में गांव की युवती योगिता भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। हर पड़ाव पर योगिता कोमल का हौसला बढ़ा रही हैं और इस संकल्प को पूरा करने में उनका साथ दे रही हैं।
पहले भी कर चुकी हैं 300 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा
कोमल के लिए कांवड़ यात्रा कोई पहली कोशिश नहीं है। इससे पहले भी वह करीब 300 किलोमीटर की पैदल कांवड़ यात्रा कर चुकी हैं। उनकी पिछली यात्रा ने क्षेत्र में खूब चर्चा बटोरी थी। इस बार खास बात यह है कि पंचायत प्रधान चुने जाने के बाद भी उन्होंने अपने पुराने संकल्प और आस्था को पीछे नहीं छोड़ा।
यानी एक ओर नई जिम्मेदारी का बोझ है तो दूसरी ओर कंधे पर कांवड़—और दोनों को निभाने का जज्बा भी।
108 एंबुलेंस में सेवा से लेकर पंचायत की कुर्सी तक
कोमल की कहानी केवल कांवड़ यात्रा तक सीमित नहीं है। उनकी पहचान लंबे समय से 108 एंबुलेंस सेवा की ईएमटी के रूप में भी रही है। आपात परिस्थितियों में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कई प्रसूताओं की सुरक्षित डिलीवरी में भी वह मदद कर चुकी हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कोमल और उनके पति राकेश दोनों 108 एंबुलेंस सेवा में कार्यरत हैं। राकेश भी ईएमटी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
दो बच्चों की मां कोमल पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ नौकरी, सामाजिक सेवा, पंचायत नेतृत्व और धार्मिक आस्था—चारों को एक साथ साध रही हैं।
चारपाई पर मरीजों का दर्द बना चुनावी संकल्प
कौलावालांभूड पंचायत में लंबे समय से चली आ रही बुनियादी सुविधाओं की कमी ने ही कोमल को पंचायत चुनाव के मैदान में उतरने के लिए प्रेरित किया।
सड़क सुविधा के अभाव में मरीजों को चारपाई पर उठाकर ले जाने की समस्या से वह खुद जुड़ी रही हैं। 108 एंबुलेंस में काम करने के दौरान उन्होंने इस परेशानी को करीब से देखा। यही दर्द बाद में उनके चुनावी संकल्प का आधार बना।
उन्होंने जनता के बीच सड़क, स्वास्थ्य और बेहतर बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा उठाया और लोगों से विकास का भरोसा दिलाया।
जनता ने भी उनके सेवा भाव और संघर्ष पर भरोसा जताया और उन्हें पंचायत प्रधान की जिम्मेदारी सौंप दी।
अब सामने है विकास की अग्निपरीक्षा
प्रधान बनने के बाद कोमल के सामने अब वही चुनौतियां हैं, जिनके खिलाफ उन्होंने चुनाव के दौरान आवाज उठाई थी। पंचायत की बुनियादी समस्याओं को दूर करना, सड़क सुविधा बेहतर करवाना और जरूरतमंद लोगों तक सुविधाएं पहुंचाना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।
इन जिम्मेदारियों के बीच उनका कांवड़ यात्रा पर निकलना उनके व्यक्तित्व का एक अलग पक्ष सामने लाता है।
एक तरफ पंचायत की प्रधान की जिम्मेदारी, दूसरी तरफ कंधे पर कांवड़ और मन में भगवान शिव के प्रति आस्था।
कोमल की यह यात्रा सिर्फ हरिद्वार से गांव तक की करीब 300 किलोमीटर की दूरी तय करने की कहानी नहीं है। यह उस महिला के संकल्प की कहानी है, जिसने पहले एंबुलेंस में जरूरतमंदों तक पहुंचकर सेवा की, फिर जनता के बीच जाकर नेतृत्व का भरोसा जीता और अब उसी समर्पण के साथ भगवान शिव की भक्ति में पैदल सफर कर रही है।
सेवा से नेतृत्व तक और आस्था से संकल्प तक—कोमल रघुवंशी का यह सफर निश्चित तौर पर अपने आप में एक अलग कहानी कहता है।