
हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर कांग्रेस पार्टी में सियासी हलचल बढ़ा गई है। दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी की मीटिंग से शिमला लौटने के बाद प्रतिभा सिंह ने कहा है वह मंडी सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगी। उन्होंने स्क्रीनिंग कमेटी में अपना नाम हटाने को बोल दिया है।
प्रतिभा सिंह ने चुनाव न लड़ने के पीछे की वजह मौजूदा स्थिति अच्छी न होना बताया है। उनका कहना है कि सिर्फ मेंबर ऑफ पार्लियामेंट फंड बांटने से चुनाव नहीं जीता जाता। हमारा वर्कर निराश बैठा है। उन्हें जो समय पर सरकार में महत्व मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल पाया। इसलिए, आज उन्हें कोई वर्कर ऐसा नजर नहीं आ रहा, जो पार्टी का काम करेगा।
यदि कार्यकर्ता चुनाव जिताने में अहम रोल निभाते हैं। तो वह बार-बार वर्कर्स को महत्व देने की बात करती रही हैं। वह हर बार लगातार फील्ड में रही हैं। उसके मुताबिक उन्हें नहीं लग रहा कि वह ज्यादा सफलता हासिल कर पाएंगी। इसलिए, हाईकमान जिसे ठीक समझे, उसे फील्ड में उतारें।
मंडी तक ही हम सीमित नहीं रहते हैं इसलिए नहीं लडूंगी प्रतिभा सिंह ने यह भी कहा कि हमारे लिए लोकसभा के साथ-साथ उप-चुनाव भी जरूरी है। मंडी तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। इसलिए, वह चुनाव न लड़कर पूरे प्रदेश में जाएंगी। पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, उसे निभाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार को बचाने और बहुमत साबित करने के लिए उप-चुनाव जीतना होगा।
प्रतिभा सिंह का कहना है कि हम मेहनत कर रहे हैं। फील्ड में हम लोग हैं। सभी कार्यकर्ताओं को भी आभास हो चुका है हमें चुनाव का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सभी कोशिश करेंगे कि छोटी-मोटी. नाराजगी दूर करें।
सूत्र की बात की जाए तो बीजेपी की हाईकमान ने इन बागी विधायकों के चुनाव क्षेत्र में पार्टी नेताओं को मनाने को भी कह दिया है। मगर बागियों की एंट्री की खबर से तिलमिलाएं भाजपा नेताओं में भी बनी हुई है और इलेक्शन कमीशन द्वारा उप चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रचार भी शुरू कर दिया है। जाहिर है कि बागियों की बीजेपी में एंट्री को पचा पाना भाजपा के लिए इतना आसान नहीं होगा। इससे 2022 के विधानसभा चुनाव की तर्ज पर बीजेपी में फिर से बगावत झेलनी पड़ सकती है।
