ब्रेकिंग न्यूज बड़सर की जनता को जलसंकट के बीच छोड़ अब कहां गए जिला के मुख्यमंत्री —– लखनपाल

 

 

 

जलसंकट के दौर से गुजर रहे बड़सर विस क्षेत्र मे उप चुनावों के दौरान खुद को जनता हितैशी कहने बाले मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुखू और उनके कांग्रेस नेताओं की फ़ौज अब मुश्किल वक़्त मे जनता से नदारद क्यों है! यह सवाल बड़सर के विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने जारी प्रेस ब्यान के माध्यम से उठाये है! लखनपाल ने कहा क़ी प्रदेश मे कांग्रेस सरकार है और मुख्यमंत्री उप चुनावों मे स्वयं इस बात की जिम्मेदारी ले चुके है क़ी वह बड़सर मे जनता की मुश्किलों का प्राथमिकता से हल करेंगे लेकिन पेयजल संकट से जूझ रही बड़सर की जनता को मुश्किल से निकालने मे न तो मुख्यमंत्री सामने आ रहे है और न ही बड़सर कांग्रेस के वह तमाम नेता दिखाई दे रहे है जिन्होंने अपने जिला का मुख्यमंत्री होने के नाम पर लोगों को गुमराह करने मे कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी! उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री व उनके नेताओं की फ़ौज हमेशा ही झूठे बायदे कर जनता को बरगलाने का प्रयास करती आ रही है और उप चुनावों मे भी उसी झूठ के सहारे चुनाव जीतने की कोशिश की गई लेकिन प्रबुद्ध जनता के फैसले के आगे वह अपने षड्यंत्र मे कामयाव नहीं हो सके है! लखनपाल ने कहा कांग्रेस मे नेता तो सभी बनना चाहते है लेकिन जनसेवक कोई नहीं बनना चाहता है! उन्होंने कहा उप चुनावों के बाद से ही समुचे बड़सर विस क्षेत्र मे पानी की किलत आ चुकी है लेकिन जिला का मुख्यमंत्री बाली सरकार ने बड़सर की जनता को कोई राहत नहीं पंहुचाई है! लखनपाल बोले अपने और पराये का असल पता मुश्किल वक़्त मे चलता है! मुख्यमंत्री ने सता मे आने के बाद से ही बड़सर से पराये बाला व्यवहार किया है लेकिन बड़सर मेरा घर है और जनता मेरा परिबार अपने परिबार को मुश्किल मे देखना मेरे लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है! उन्होंने कहा कि इस जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों को पानी के टेंकर भेजकर समस्या को कम करने का प्रयास किया जा रहा है! रोजाना दर्जनों टेंकर विभिन्न क्षेत्रों मे भेजे जा रहे है ताकि लोगों को पीने योग्य पानी मिल सके! लखनपाल ने कहा कि हर मुश्किल व खुशी के दौर मे मै अपने परिबार के साथ खड़ा रहा हुँ और आगे भी खड़ा रहूंगा! लेकिन बड़सर की जनता कांग्रेस के उन नेताओं को जरूर पूछे की मुख्यमंत्री ने जल संकट से जूझ रहे बड़सर के लिए जिला का मुख्यमंत्री होने के नाते क्या किया है!

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Author: powan dhiman

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