आर्थिक बदहाली से प्रदेश को बाहर निकालने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू द्वारा गठित रिसोर्स मोबेलाइजेशन कमेटी की मंगलवार दोपहर बाद सचिवालय में अहम मीटिंग हुई।

 

मुख्यमंत्री सुक्खू ने डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में रिसोर्स मोबेलाइजेशन के लिए कैबिनेट सब कमेटी गठित कर रखी है। इसमें मुकेश अग्निहोत्री के अलावा कृषि मंत्री चंद्र कुमार, उद्योग मंत्री हर्ष वर्धन चौहान, टीसीपी मिनिस्टर राजेश धर्माणी सदस्य हैं। इस कमेटी की आज सचिवालय में अहम मीटिंग हुई है।

कैबिनेट सब कमेटी के सदस्य एवं टीसीपी मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि, प्रदेश में जितना टैक्स इक्ट्ठा हो रहा, लगभग उतना ही पैसा लोन की किश्त और ब्याज चुकाने में जा रहा है। इसलिए कदम उठाने जरूरी है। आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए आने वाले दिनों में सख्त निर्णय लेने पड़ सकते हैं। मुफ्त की सेवाओं में भी कटौती हो सकती है। उन्होंने कहा कि, साधन संपन्न लोगों को मुफ्त सेवाएं गलत है। यह जरूरतमंदों को ही मिलती रहनी चाहिए।

राजेश धर्माणी ने कहा कि, प्रदेश के विभिन्न विभागों में गेजेटेड अफसरों का युक्तिकरण जरूरी है। यानी जहां 10 अधिकारी हैं, वहां जरूरत के हिसाब से 5 से 6 अफसर रखे जाएंगे। उन्होंने कहा कि, साल 2006 से 2022 के बीच 16 साल में गेजेटेड ऑफिसर की संख्या में 62 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि गेजेटेड ऑफिसर कम करके जरूरत के हिसाब से फील्ड व निचला स्टाफ बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि जनता तक विभिन्न सेवाओं को आसानी से पहुंचाया जा सके।

 

धर्माणी ने कहा, अनप्रोडक्टिव खर्च कम करने होंगे। विभिन्न विभागों, बोर्ड व निगमों में सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग पर भी अंकुश लगाना होगा। सरकारी गाड़ियों का दुरुपयोग रोकना होगा। बोर्ड-निगमों को खुद आर्थिक संसाधन जुटाने होंगे।

राजेश धर्माणी ने कहा कि, हिमाचल में जब कांग्रेस सरकार बनी तब राज्य पर 80 हजार करोड़ रुपए का ज्यादा का कर्ज चढ़ चुका था। 31 मार्च 2023 तक यह 86589 करोड़ हो गया था। 10 हजार करोड़ रुपए की कर्मचारियों की देनदारी सरकार के पास है

 विपरीत रेवेन्यू डेफिसिएट ग्रांट लगातार कम हो रही है। 14वें वित्त आयोग में हिमाचल को रेवेन्यू डेफिसिएट ग्रांट40624 करोड़ रुपए मिले थे। 15वें वित्त आयोग में यह बढ़ने के बजाय कम होकर 37199 करोड़ रह गया। साल 2021-22 में 10249 करोड़ मिली थी, जो कि 2025-26 में 3257 करोड़ की रह जाएगी। इससे अर्थव्यवस्था डगमगा रही है।

आफिसर के पदों का युक्तिकरण करने से पहले विभिन्न विभागाध्यक्षों से सुझाव लिए जाएंगे और देखा जाएगा कि कहां कितने अधिकारियों की जरूरत है। इस हिसाब से पदों का युक्तिकरण किया जाएगा। कैबिनेट सब कमेटी में खर्च कम करने और आय के साधन बढ़ाने को लेकर भी चर्चा की गई। आज की मीटिंग में निर्णय लिया गया कि जल्द दोबारा मीटिंग बुलाई जाए, इसमें मुख्य सचिव और वित्त सचिव को भी बुलाया जाए और आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए सुझाव तैयार कर कैबिनेट को भेजे जाएंगे। इन पर अंतिम निर्णय कैबिनेट मीटिंग में होगा।

हिमाचल प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति पर 1 लाख 16 हजार 180 रुपए का कर्ज हो गया है, देश में अरुणाचल प्रदेश के बाद सर्वाधिक है।  आर्थिक बदहाली से प्रदेश को बाहर निकालने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू द्वारा गठित रिसोर्स मोबेलाइजेशन कमेटी की मंगलवार दोपहर बाद सचिवालय में अहम मीटिंग हुई। इसमें अनावश्यक खर्चे कम करने, सरकारी गाड़ियों व अफसरों की मौज रोकने और अफसरों का युक्तिकरण करने जैसे सुझाव पर चर्चा की गई।

 

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Author: powan dhiman

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