ब्रेकिंग न्यूज शिमला.. इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल यानी आईजीएमसी में आगामी 12 अगस्त से मरीजों को ओपीडी में उपचार की सुविधा नहीं मिलेगी।

शिमला

इंद्र गांधी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल यानी आईजीएमसी में आगामी 12 अगस्त से मरीजों को ओपीडी में उपचार की सुविधा नहीं मिलेगी।

प्रदेश सरकार व स्वस्थ्य विभाग ने 262 करोड़ की लागत से चमियाना में बने अटल सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान को फंक्शनल करने के लिए आठ विभागों की ओपीडी सेवाओं को सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में शिफ्ट करने का निर्णय लिया है।

 

एमएस आईजीएमसी राहुल राव ने बताया कि आपातकालीन, ऑपरेशन, वार्ड व इंडोर जैसी सेवाएं फिलहाल इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में ही चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि शुरुआती तौर पर OPD सेवाओं को शिफ्ट करने का निर्णय लिया है। लेकिन मानसून में परिस्थितियां अनुकूल रही तो 30 सितंबर तक आपातकालीन और ऑपरेशन जैसी सभी सेवाओं को सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल चमियाना में शिफ्ट किया जाएगा। मरीजों को एक छत के नीचे सभी तरह के उपचार की सुविधा मिलेगी।

अटल सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना के प्रिंसिपल डॉ ब्रिज चौहान ने बताया कि आगामी 12 अगस्त से अस्पताल में आठ विभागों जिसमें कार्डियोलॉजी, यूरोलोजी, गैस्ट्रोलॉजी, न्यूरोलोजी, नेफ़ॉलोजी, प्लास्टिक सर्जरी व एंडोक्रिनोलोजी विभाग की ओपीडी सेवाएं नियमित रूप से मरीजों को दी जाएंगी।

शड्यूल

अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ सुधीर शर्मा ने बताया कि अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी सोमवार से शुक्रवार तक लगातार, यूरोलोजी की सोमवार, बुधवार व शुक्रवार, गैस्ट्रोलॉजी, सोमवार, वीरवार, शुक्रवार, न्यूरोलोजी, मंगलवार, शुक्रवार, शनिवार, एंडोक्रिनोलोजी को मंगलवार, बुधवार, शुक्रवार, प्लास्टिक सर्जरी सोमवार, मंगलवार, वीरवार शनिवार और नेफ़ॉलोजी की ओपीडी में मंगलवार और शुक्रवार को मरीजों का इलाज होगा।

प्रदेश सरकार व स्वस्थ्य विभाग ने ओपीडी सेवाओं को आईजीएमसी से चमियाना शिफ्ट तो कर दिया है। लेकिन मरीजों को वहां पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना के लिए एक तो उचित पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है। वहीं दूसरी ओर हॉस्पिटल जाने वाली सड़क की हालात बेहद खस्ता है।

हालांकि प्रबंधन की तरफ दावा किया जा गया है कि हॉस्पिटल पहुंचने वाली सड़क कि हालात पहले से बेहतर है। एचआरटीसी के कुछ रूट अभी चल रहे है लेकिन मरीजों क़ो आने जाने में किसी तरह की असुविधा ना हो एचआरटीसी के साथ अतिरिक्त बसें चलाने के लिए बातचीत की जा रही है।

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Author: powan dhiman

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