हिमाचल सरकार पर धन के दुरुपयोग का आरोप, राजेंद्र राणा ने की केंद्र से राष्ट्रपति शासन की मांग

हिमाचल प्रदेश में केंद्र से आए विकास योजनाओं के धन के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाते हुए सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने राज्य सरकार और अधिकारियों पर तीखे प्रहार किए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आए धन को राज्य सरकार ने अन्य मदों में डायवर्ट कर दिया है। आज यहां जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने इसे राजनीतिक दबाव में किया गया भ्रष्टाचार करार दिया और इसकी उच्चस्तरीय जांच केंद्रीय एजेंसियों से करवाने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के ठेकेदारों को विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपए का काम करवाने के बावजूद उनकी पेमेंट रोक दी गई है। ठेकेदारों द्वारा बैंकों से उठाए गए लोन का भुगतान ना होने से वे आर्थिक संकट में घिर गए हैं। डिपॉजिट का पैसा भी सही मद में न देकर अन्य जगहों पर खर्च किया जा रहा है। राणा ने आरोप लगाया कि भ्रष्ट अधिकारियों के चलते यह कार्य हो रहा है।

उन्होंने सैनिक स्कूल सुजानपुर के फंड के डायवर्जन पर भी सवाल उठाए और कहा कि सरकार ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को बद से बदतर कर दिया है। सरकार के गलत फैसलों की वजह से माननीय उच्च न्यायालय को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।

राजेंद्र राणा ने प्रदेश में कर्मचारियों के लंबित भत्तों के भुगतान में देरी और कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी मोर्चों पर फेल हो चुकी है और अब प्रदेश को बर्बादी से बचाने के लिए केंद्र सरकार को हिमाचल सरकार को तुरंत भंग कर राष्ट्रपति शासन लागू करना चाहिए।

राजेंद्र राणा ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रदेश भर में चर्चा तेज हो गई है और जनता भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रही है। प्रदेश को आर्थिक बदहाली से बचाने के लिए केंद्र सरकार को अब समुचित कदम उठाने चाहिए।

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Author: powan dhiman

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