किशोरावस्था में विशेष पोषण की आवश्यकता : सीडीपीओ टौणी देवी स्कूल में ‘किशोरावस्था एवं उचित पोषण व्यवहार’ विषय पर जागरुकता कार्यक्रम आयोजित

महिला एवं बाल विकास विभाग की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ एवं ‘वो दिन’ योजना के तहत सोमवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टौणी देवी में ‘किशोरावस्था एवं उचित पोषण व्यवहार’ विषय पर एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।

विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी और सीडीपीओ कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए सीडीपीओ कुलदीप सिंह चौहान ने कहा कि किशोरावस्था में सही पोषण के द्वारा बाल्यावस्था की पोषण समस्याओं के प्रभाव को कम कर कुपोषण के दुष्चक्र को तोड़ा जा सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी वृद्धि एवं विकास का आकलन वजन और लंबाई में दर्ज होने वाली बढ़ोतरी की निगरानी के द्वारा स्वयं भी कर सकते हैं। हर माह के दूसरे शनिवार को वे निकटतम आंगनवाड़ी केंद्र में जाकर सही पोषण मानकों के साथ साथ उचित परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में लड़कियों की लंबाई में 25 सेंटीमीटर तक और लड़कों की लंबाई में 30 सेंटीमीटर तक की वृद्धि होती है जो संपूर्ण जीवन काल की वृद्धि का लगभग छठा भाग है। इसी अवधि के दौरान वजन में होने वाली वृद्धि संपूर्ण जीवन काल की वृद्धि का लगभग 50 प्रतिशत होती है।

सीडीपीओ ने कहा कि वृद्धि एवं विकास कि इस दर को बनाए रखने के लिए इस काल में किशोर-किशोरियों को ऊर्जा से भरपूर भोजन की बजाय पोषण से भरपूर भोजन की आवश्यकता होती है। इस दृष्टि से किशोरावस्था में मोटे अनाजों से युक्त भोजन ही सर्वाधिक उपयोगी भोजन है। कुलदीप सिंह चौहान ने कहा कि सुपर फूड एवं स्मार्ट फूड के नाम से विख्यात हो रहे ये खाद्य पदार्थ न केवल सूक्ष्म पोषक तत्वों से परिपूर्ण हैं अपितु फाइबर के भी श्रेष्ठ भंडार हैं।

इस अवसर पर सिविल हॉस्पिटल टौणी देवी की डॉक्टर कनुप्रिया ने पोषण विविधता पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी एक खाद्य सामग्री किसी व्यक्ति के शारीरिक विकास के लिए वांछित सभी पोषक तत्वों की आपूर्ति नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि विविधता भोजन की उपयोगिता, अनुकूलता और स्वीकार्यता में भी वृद्धि लाती है।

स्वास्थ्य शिक्षक कमल भारती ने भोजन में मौसम और स्थानीयता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट आहार उपलब्धता, पसंद एवं स्वाद होता है जिसका उपयोग कर हम अपनी दैनिक पोषण आवश्यकताओं की कम लागत में पूर्ति कर सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान आयोजित पोषण रंगोली प्रतियोगिता में चेतना और प्रियांशु क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय स्थान पर रहे। पेंटिंग प्रतियोगिता में भारती प्रथम व अंशिका द्वितीय स्थान पर रही। नारा लेखन में प्रज्ञान प्रथम तथा अनन्या द्वितीय स्थान पर रहे।

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Author: powan dhiman

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