पारंपरिक पैदल स्नान यात्रा शिमला से ज्वाला जी व नारकोट, कांगड़ा के लिए रवाना

शिमला जिले के ठियोग क्षेत्र में स्थित देवी मां कडासन पालू स्थान से पारंपरिक पैदल स्नान यात्रा विधिवत रूप से प्रारंभ हो चुकी है। यह ऐतिहासिक यात्रा ज्वाला जी और नारकोट, कांगड़ा तक जाएगी और श्रद्धालु 10 अप्रैल 2025 तक माता के साथ अपनी यात्रा पूर्ण करेंगे। वर्षों पुरानी यह परंपरा हर 10 से 15 वर्षों में एक बार संपन्न होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। जो शिमला से तहसील चौक होते हुए गोंद गांव पहुंचे और वहां से नगरकोटी स्थित माता ब्रजेश्वरी मंदिर की ओर अग्रसर हैं। यह यात्रा धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है। परंपरा के अनुसार, प्रत्येक परिवार से कम से कम एक सदस्य इस यात्रा में सहभागिता सुनिश्चित करता है।

यात्रा के दौरान श्रद्धालु अपने साथ भोजन सामग्री लेकर चलते हैं और मार्ग में स्वयं भोजन तैयार कर केवल एक समय भोजन ग्रहण करते हुए आगे बढ़ते हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य माता ब्रजेश्वरी मंदिर में स्नान एवं पूजा-अर्चना कर अपनी श्रद्धा व्यक्त करना है।

यात्रा समिति से जुड़े संजय भूषण ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और श्रद्धालु पूरी भक्ति और श्रद्धा के साथ इसमें भाग लेते हैं। यात्रा के समापन पर सभी श्रद्धालु अपने मूल स्थान लौटकर भव्य उत्सव का आयोजन करते हैं, जिसमें माता के स्नान और पूजा-अर्चना संपन्न होने की खुशी मनाई जाती है। इस धार्मिक यात्रा का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर को भी संजोए रखना है।

इस यात्रा में प्रमुख श्रद्धालु संजय भूषण, मेहर सिंह चौहान, हीरा सिंह चौहान, केहर सिंह चौहान, सुरेश चौहान, तुलसीराम चौहान, मोहनलाल चौहान, कपिल चौहान, प्रकाश शर्मा, राहुल शर्मा, मोतीलाल शर्मा, जोगिंदर चौहान, सोहनलाल चौहान सहित श्रद्धालु हैं।

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Author: powan dhiman

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