जंगल की बलि चढ़ा NH-3 निर्माण! कंपनी का मनमाना रवैया, अवैध मलबे से दब गए हजारों पेड़… प्रशासन कब करेगा कार्रवाई?

पवन धीमान, हमीरपुर

राष्ट्रीय राजमार्ग 03 के निर्माण कार्य में जुटी कंपनी एक बार फिर विवादों के घेरे में है। कंपनी पर टोनी देवी पुलिस चौकी के समीप अवैध रूप से लाखों टन मलबा डंप करने का आरोप लगा है, जिससे क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस घटना ने न केवल कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर किया है।

*पेड़-पौधों का विनाश, वन विभाग को भारी नुकसान*
कंपनी द्वारा डंप किए गए मलबे ने खैर समेत हजारों पेड़-पौधों को नष्ट कर दिया है। कई पेड़ मलबे के भार से गिरने की कगार पर हैं, जबकि कुछ पहले ही नष्ट हो चुके हैं। वन विभाग को इससे लाखों रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि गाँव के कुछ लोगों के दबाव में यह डंपिंग करवाई गई, लेकिन इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया है।

*ग्रामीणों के बीच मतभेद, किसने दिया मलबा डालने का आदेश?*
दरकोटी गाँव की एक महिला ने खुलासा किया है कि गाँव के एक व्यक्ति ने घर-घर जाकर लोगों के हस्ताक्षर लिए और मलबा डंप करवाने में अहम भूमिका निभाई। हालाँकि, इस दावे की सच्चाई जाँच के बाद ही सामने आ पाएगी।

वहीं, स्थानीय वार्ड पंच सुमन चौहान ने इस डंपिंग को पूरी तरह अवैध बताया और कहा कि उन्हें नहीं पता कि किसके आदेश पर यह कार्रवाई हुई। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की एक बैठक में श्मशान घाट को बचाने के लिए पुलिस चौकी के नजदीक मलबा डालने की सहमति बनी थी, लेकिन कंपनी ने मनमर्जी से कहीं भी मलबा ढो दिया।

*प्रशासन ने की जाँच, पर अब तक नहीं हुई कार्रवाई*
पिछले हफ्ते जब यह मामला एसडीएम हमीरपुर के संज्ञान में आया, तो उन्होंने कंपनी के साइट इंजीनियर को तलब कर पूछताछ की। इंजीनियर ने कुछ ग्रामीणों के दबाव में डंपिंग साइट बदलने की बात स्वीकारी और मलबा हटाने का आश्वासन दिया। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।

*सवाल यह है: क्या कंपनी और प्रशासन मिलकर पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहे हैं?*
इस पूरे प्रकरण ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्या कंपनी को बिना अनुमति के मलबा डालने की छूट मिली हुई है? क्या प्रशासन की मिलीभगत से यह सब हो रहा है? जनता जवाब चाहती है!

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Author: powan dhiman

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